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मुस्लिम समाज को 14% आरक्षण देने की मांग, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

 

लोणार | फिरदोस खान पठाण

लोणार के तहसीलदार भूषण पाटिल के माध्यम से मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को महाराष्ट्र के मुस्लिम समाज की शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक उन्नति के लिए शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 14% आरक्षण तत्काल घोषित करने संबंधी ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि राज्य में मुस्लिम समाज की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अत्यंत गंभीर है तथा उनकी शैक्षणिक प्रगति राष्ट्रीय औसत से कम है। सरकारी सेवाओं में अत्यल्प प्रतिनिधित्व, शहरी झुग्गी बस्तियों में बड़ी संख्या में निवास तथा वित्तीय समावेशन में पिछड़ापन चिंता का विषय बताया गया है।

ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2014 में महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम समाज के लिए 5% शैक्षणिक आरक्षण की घोषणा की थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। परिणामस्वरूप वर्तमान में मुस्लिम समाज किसी भी स्वतंत्र आरक्षण से वंचित है।

केंद्र सरकार द्वारा गठित Sachar Committee तथा अन्य आयोगों की सिफारिशों का हवाला देते हुए ज्ञापन में कहा गया है कि मुस्लिम समाज सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत विशेष प्रावधान करना पूरी तरह से संवैधानिक बताया गया है।

प्रमुख मांगें:

  • मुस्लिम समाज को शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 14% आरक्षण तत्काल घोषित किया जाए।
  • सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को अद्यतन कर सरकारी श्वेतपत्र जारी किया जाए।
  • व्यावसायिक शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास और वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार किया जाए।
  • सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए जाएं।

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य के समग्र विकास के लिए सभी वर्गों को समान अवसर मिलना आवश्यक है और मुस्लिम समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलने से राज्य की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को बल मिलेगा।

इस ज्ञापन पर लोणार के 200 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर किए। ज्ञापन एडवोकेट मोहम्मद रिजवान जद्दा, आबेद खान (उपाध्यक्ष), समद भाई, रिजवान खान, हाजी महमूद सेठ, वसीफ खान, उबैद भाई (मेंबर), जमील कुरैशी (मेंबर), जावेद कुरैशी (मेंबर), प्रा. लुकमान कुरैशी, एड. खिज़ल अली, हाफिज राजिक, हाजी इकराम, गफूर भाई, जकी, मो. अनस सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री से निवेदन किया गया है कि वे इस ज्ञापन पर सहानुभूतिपूर्वक और संवैधानिक दृष्टिकोण से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लें।

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