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जालना जिला एवं सत्र न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: सामूहिक दुष्कर्म के पाँच दोषियों को 20 वर्ष का कठोर कारावास

जालना | कादरी हुसैन

जालना जिला एवं सत्र न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पाँचों आरोपियों को दोषी ठहराया है। मा. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-03 कृपेश विजय मोरे ने पुलिस स्टेशन बदनापुर के अपराध क्रमांक 445/2022 में यह फैसला सुनाया।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(ड) के अंतर्गत आरोपी क्रमांक 01 संदीप कारभारी कोल्हे (22), आरोपी क्रमांक 02 सुंदरराव किसनराव कोल्हे (40), आरोपी क्रमांक 03 दत्तु कुशाभाउ खमाटे (60), आरोपी क्रमांक 04 बाबासाहेब संतोष कोलो (34) तथा आरोपी क्रमांक 05 लक्ष्मण बाबुराव सोरमार (34), सभी निवासी दाभाड़ी, तालुका बदनापुर, जिला जालना — को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹60,000-₹60,000 जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक को 6 माह का सश्रम कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा।

साथ ही, धारा 376 भादंवि के तहत आरोपी संदीप कारभारी कोल्हे को पृथक रूप से 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹60,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

मामले की पृष्ठभूमि
28 जुलाई 2022 की मध्यरात्रि लगभग 12:30 बजे पीड़िता अपने पति के साथ घर पर सोई हुई थी। इसी दौरान वह घर से लापता हो गई। परिजनों की खोजबीन के बाद व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से सूचना मिली कि पीड़िता टेंभुर्णी बस स्टैंड पर है। परिजन जब वहाँ पहुँचे तो वह अचेत अवस्था में मिली।

घर लाने के बाद पीड़िता ने बताया कि आरोपी संदीप ने उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर सिल्लोड ले जाने का बहाना किया और दाभाड़ी स्थित एक स्थान पर जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद अन्य आरोपियों ने दाभाड़ी दरगाह के सामने स्थित एक ढाबे के आंतरिक कक्ष में बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया और अंत में उसे टेंभुर्णी बस स्टैंड पर छोड़ दिया।

इस संबंध में पुलिस स्टेशन बदनापुर में अपराध क्रमांक 445/2022 के तहत धारा 376 व 376(ड) भादंवि के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

साक्ष्य और जांच
सरकार पक्ष की ओर से कुल 7 साक्षियों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता, उसके पति (फरियादी), चिकित्सकीय अधिकारी तथा जांच अधिकारी के साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे। जांच के दौरान पीड़िता की मानसिक स्थिति का परीक्षण कराया गया, जिसमें उसे न्यायालय में शपथपूर्वक बयान देने के लिए सक्षम पाया गया। अदालत में उसने सभी आरोपियों की पहचान की।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष सरकारी अभियोक्ता एडवोकेट वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम तथा अतिरिक्त सरकारी वकील शशांक ढोकरट ने प्रभावी पैरवी की।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक जालना के मार्गदर्शन में संपन्न हुई, जिसमें संबंधित अधिकारियों और कोर्ट पैरवी शाखा का सहयोग रहा।

अदालत के इस निर्णय को गंभीर अपराधों के विरुद्ध सख्त न्यायिक रुख के रूप में देखा जा रहा है।

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