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मुस्लिम आरक्षण मोर्चे पर ॲड. प्रा. इलियास इनामदार की दो टूक: समर्थन भी, शर्त भी—संयोजकों से जवाबदेही की मांग

बीड/प्रतिनिधि – द्वारा: अमजद अली 

17 अप्रैल को प्रस्तावित मुस्लिम आरक्षण मोर्चे को महाराष्ट्र मुस्लिम आरक्षण संघर्ष समिति और लोकसेना संगठन ने सशर्त समर्थन देने की घोषणा की है। समिति के जिलाध्यक्ष एवं लोकसेना संगठन के प्रमुख ॲड. प्रा. इलियास इनामदार ने समाज के लोगों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।

इनामदार ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन अधूरा छोड़ा गया तो पहले की तरह समाज को गुमराह करने की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। उन्होंने पूर्व के आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण समाज में भ्रम और असंतोष पैदा हुआ था।

उन्होंने मोर्चा संयोजकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और वास्तविक उद्देश्य समाज के सामने स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में इस तरह की चर्चाएं हैं कि आयोजक किसी राजनीतिक नेता से जुड़े हो सकते हैं, इसलिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि आम लोग किसी अफवाह या भावनात्मक बहाव में न आएं।

इनामदार ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम आरक्षण आंदोलन किसी एक व्यक्ति या संगठन की जागीर नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कोई भी आंदोलन कर सकता है, लेकिन उसकी नीयत और दिशा स्पष्ट होनी चाहिए।

अपने पिछले अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर 2016 के मोर्चे में वे स्वयं संयोजक थे और उस समय उन्होंने पार्टी पद छोड़कर आंदोलन को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने कहा कि लोकसेना संगठन का उद्देश्य केवल समाज के मुद्दों पर सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज कुछ लोग आंदोलनों के जरिए भीड़ इकट्ठा कर राजनीतिक फायदे लेने की कोशिश करते हैं, जैसे पद, टिकट या ठेके हासिल करना। उन्होंने ऐसे लोगों को चेतावनी दी कि समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि वे स्वयं अपने कार्यकर्ताओं के साथ मोर्चे में शामिल होंगे और समाज से अपील की कि वे बड़ी संख्या में भाग लेकर सरकार पर मुस्लिम आरक्षण लागू करने का दबाव बनाएं।

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