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गाजियाबाद लव जिहाद केस में आया नया मोड़: युवती ने खुद को बताया बालिग, परिजनों पर लगाए धमकी देने के आरोप, कहा – “अकबर खान मेरा पति है, हमें सुरक्षा दी जाए”

गाजियाबाद के चर्चित लव जिहाद केस में अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है। युवती ने एक वीडियो बयान जारी कर मामले को पूरी तरह पलट दिया है। उसने अपने ही परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि वह पिछले नौ सालों से अकबर खान के संपर्क में है तथा तीन साल पहले दोनों ने आपसी सहमति से शादी भी कर ली थी।

युवती का कहना है कि जब उसके घरवालों को इस शादी की जानकारी हुई, तो उन्होंने न केवल उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे और उसके पति को जान से मारने की धमकी भी दी। युवती ने साफ कहा कि उसके माता-पिता लगातार उसके पति अकबर खान को धमका रहे हैं और अब इस पूरे मामले को ‘लव जिहाद’ का नाम देकर साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

वीडियो बयान में की सुरक्षा की मांग

युवती ने वीडियो जारी कर पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है और अकबर खान को निर्दोष बताते हुए उसकी रिहाई की मांग की है। जानकारी के मुताबिक, युवती के परिजनों ने शुक्रवार को गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में अकबर खान के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें लव जिहाद सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद शनिवार को पुलिस ने अकबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

सोमवार को दुकान में तोड़फोड़, पुलिस रही मूकदर्शक

सोमवार को इस मामले ने और तूल पकड़ा, जब बड़ी संख्या में लोग अकबर खान की दुकान में घुस गए और जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन किसी ने भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की। बताया जा रहा है कि युवती के पिता भाजपा नेता हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि अकबर ने उनकी बेटी को प्रेमजाल में फंसा कर अगवा किया है।

अब पुलिस एक्शन में

घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि तोड़फोड़ करने वालों की पहचान की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

जानबूझकर भड़काया जा रहा है मामला?

युवती के बयान और घटनाक्रम से यह साफ हो रहा है कि यह मामला लव जिहाद का नहीं, बल्कि दो बालिगों के आपसी रिश्ते का है जिसे राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा इस मामले को तूल देकर हिंदू-मुस्लिम तनाव फैलाने की कोशिश के भी संकेत मिल रहे हैं।

यह प्रकरण एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या व्यक्तिगत संबंधों को धर्म और राजनीति के नाम पर बलि चढ़ाना एक सुनियोजित साजिश बन चुकी है? पुलिस जांच और निष्पक्ष कार्रवाई से ही सच्चाई सामने आ सकती है।

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