मराठवाड़ा स्नातक चुनाव: महायुति में घमासान, अब्दुल सत्तार और संजय शिरसाट आमने-सामने

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट महायुति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में गई है। इस चुनाव में महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार को समर्थन देने के मुद्दे पर गठबंधन के घटक दल शिवसेना के दो बड़े स्थानीय नेताओं के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। यह विवाद अब तीखी बयानबाजी तक पहुंच गया है, जिससे महायुति की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता अब्दुल सत्तार और विधायक संजना जाधव द्वारा महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार सतीश चव्हाण को नजरअंदाज कर विरोधी उम्मीदवार के प्रचार में उतरने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर राज्य के पालकमंत्री संजय शिरसाट ने आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाब दिया है।
शिरसाट ने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रमुख एकनाथ शिंदे द्वारा महायुति का धर्म निभाने का दिया गया निर्देश ही पार्टी के लिए अंतिम आदेश है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर कौन क्या बयान दे रहा है, इससे पार्टी या चुनाव में उम्मीदवार की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
अब्दुल सत्तार के आरोपों पर शिरसाट का पलटवार
अब्दुल सत्तार ने एक प्रचार सभा में संजय शिरसाट की भूमिका और पिछले 18 वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए थे। इन आरोपों का जवाब देते हुए शिरसाट ने कहा कि महायुति के वरिष्ठ नेताओं ने सतीश चव्हाण की उम्मीदवारी को मंजूरी दी है।
उन्होंने कहा कि महायुति के साथ गठबंधन धर्म निभाना प्रत्येक जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। संजय शिरसाट क्या कहते हैं या अब्दुल सत्तार क्या कहते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि एकनाथ शिंदे ने क्या निर्णय लिया है।
शिरसाट ने पार्टी की आधिकारिक भूमिका से अलग रुख अपनाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे बयानों को महत्व नहीं देते, जो पार्टी के अधिकृत रुख के विपरीत हों।
बागियों पर कार्रवाई के संकेत, वरिष्ठ नेताओं को भेजी जाएगी रिपोर्ट
महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ जाकर महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार का समर्थन करने वाले नेताओं पर पार्टी क्या कार्रवाई करेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
संजय शिरसाट के आक्रामक रुख से महायुति के भीतर मतभेद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बगावती रुख अपनाने वाले नेताओं और उनके प्रचार से संबंधित जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाने के संकेत भी दिए हैं।
शिवसेना के नेता ही आमने-सामने
कुछ दिन पहले अमरावती के मुद्दे पर पैदा हुए विवाद के शांत होने की चर्चा थी। लेकिन अब अब्दुल सत्तार के आक्रामक रुख और संजय शिरसाट के तीखे जवाब ने मराठवाड़ा स्नातक चुनाव का माहौल गरमा दिया है।
गठबंधन के स्थानीय नेता ही एक-दूसरे के सामने खड़े होने से राजनीतिक गलियारों में चुनावी नतीजों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस अंदरूनी खींचतान का महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
सतीश चव्हाण और संजय शिरसाट के बीच हुई थी मुलाकात
दरअसल, संजय शिरसाट शुरुआत में महायुति के उम्मीदवार सतीश चव्हाण की उम्मीदवारी को लेकर सकारात्मक नहीं थे। बाद में सतीश चव्हाण ने उनके आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई और इसके बाद उन्होंने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की।
उस समय संजय शिरसाट ने घोषणा की थी कि उनके बीच का विवाद समाप्त हो गया है और महायुति में अब कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि शिवसेना पूरी ताकत के साथ सतीश चव्हाण के लिए चुनाव प्रचार करेगी।
हालांकि, अब अब्दुल सत्तार और संजय शिरसाट के बीच सामने आए विवाद ने एक बार फिर महायुति की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
