सोशल मीडिया पर ‘डॉन-भाई’ बनने वालों पर पुलिस का शिकंजा, औरंगाबाद में होगी सीधी गिरफ्तारी

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
सोशल मीडिया पर हाथों में पिस्तौल, तलवार, कोयता और लाठियां लेकर खुद को ‘डॉन’, ‘भाई’ और ‘किंग’ बताने वाले युवकों पर अब पुलिस का शिकंजा कसने लगा है। इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपराध और अपराधियों का महिमामंडन करने वाले तथा मोक्का और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों के आरोपियों को आदर्श बताकर रील्स पोस्ट करने वालों के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए अपराध का महिमामंडन करने की प्रवृत्ति पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। कई कॉलेज छात्र, बेरोजगार युवक और स्थानीय स्तर के असामाजिक तत्व हथियारों के साथ रील्स बनाकर गुंडागर्दी वाले गानों पर वीडियो पोस्ट करते हैं। इनमें वे खुद को ‘भाई’, ‘दादा’, ‘डॉन’ और ‘किंग’ जैसे नामों से पेश करते हैं। इतना ही नहीं, मोक्का और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों के आरोपियों के साथ फोटो, वीडियो, जन्मदिन के पोस्टर, जमानत के बाद स्वागत समारोह और अदालत व जेल परिसर से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किए जाते हैं।
पुलिस का कहना है कि ऐसे वीडियो युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित कर रहे हैं और कई लोग आगे चलकर मारपीट, रंगदारी, अवैध हथियार रखने, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध में शामिल हो रहे हैं। मुकुंदवाड़ी, पुंडलिकनगर, जिन्सी, बेगमपुरा, हर्सूल, वाळूज और सातारा क्षेत्र के कुछ सक्रिय अपराधियों और उनके गिरोहों के सोशल मीडिया खातों पर इस तरह की सैकड़ों पोस्ट और वीडियो लगातार अपलोड किए जा रहे हैं।
पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार और पुलिस उपायुक्त शशिकांत सातव के निर्देश पर साइबर पुलिस ने शहर में ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’ अभियान शुरू किया है। अब तक ऐसे 220 संदिग्ध सोशल मीडिया खातों की पहचान की जा चुकी है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर मामलों के आरोपियों का सोशल मीडिया पर महिमामंडन करता है या उनके समर्थन में रील्स पोस्ट करता है, तो उसे मूल अपराध में सह-आरोपी बनाया जा सकता है। हथियारों के साथ वीडियो बनाना, धमकी देना या दादागिरी दिखाने वालों के खिलाफ सीधे गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।
साइबर पुलिस ने केंद्रीय ‘सहयोग पोर्टल’ के माध्यम से अब तक 846 सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक किए हैं। इनमें 218 खाते आदतन अपराधियों के बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, एक बार सहयोग पोर्टल के माध्यम से किसी खाते को ब्लॉक किए जाने के बाद संबंधित मोबाइल नंबर से नया सोशल मीडिया अकाउंट भी नहीं बनाया जा सकेगा।