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पुणे में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से पहली मौत, मरीजों की संख्या 101 के पार

पुणे और आसपास के शहरों में फैली संदिग्ध गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) बीमारी से रविवार को पहली मौत दर्ज की गई है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने इस बीमारी के चलते अपनी जान गंवा दी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक इस बीमारी की चपेट में आए मरीजों की संख्या 101 हो गई है, जिनमें से 16 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।

स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार, संदिग्ध जीबीएस मरीज की मौत सोलापुर में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इस बीमारी से ग्रस्त 19 मरीज नौ साल से कम उम्र के हैं, जबकि 50 से 80 साल के बीच के 23 मरीज सामने आए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने दी सतर्कता बरतने की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पुणे में 9 जनवरी को अस्पताल में भर्ती एक मरीज में सबसे पहला जीबीएस मामला पाया गया था। जांच में कुछ मरीजों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया का संक्रमण पाया गया है। इससे पहले प्रशासन द्वारा पुणे में खड़कवासला बांध के पास एक कुएं के पानी में ई कोली बैक्टीरिया की उच्च मात्रा मिलने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि यह कुआं उपयोग में था या नहीं।

जीबीएस बीमारी क्या है?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जीबीएस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला कर देती है। यह आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण के बाद विकसित होता है। जीबीएस का इलाज महंगा है, जिसमें हर इंजेक्शन की कीमत लगभग 20,000 रुपये होती है।

80% मरीज छह महीने में हो जाते हैं ठीक

चिकित्सकों के अनुसार, 80 प्रतिशत रोगी छह महीने के भीतर बिना सहायता के चलने लगते हैं, लेकिन कुछ मरीजों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में एक साल या उससे अधिक का समय लग सकता है। इस बीमारी के इलाज के लिए इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG) इंजेक्शन का कोर्स जरूरी है, जो काफी महंगा है।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

प्रशासन ने नागरिकों से पानी को उबालकर और भोजन को अच्छी तरह गर्म करने के बाद ही सेवन करने की सलाह दी है। अब तक 25,578 घरों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और संभावित मरीजों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।

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