PM मोदी ने किया था प्रचार, देवेगौड़ा के पोते और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार केस में उम्रकैद
पूर्व पीएम देवेगौड़ा के पोते और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को नौकरानी से रेप केस में उम्रकैद, कर्नाटक की राजनीति को लगा गहरा झटका

कर्नाटक की राजनीति में दशकों से मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी जनता दल (सेक्युलर) इन दिनों गहरे संकट से गुजर रही है। पार्टी के ही पूर्व सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को 2 अगस्त 2025 को एक घरेलू सहायिका के साथ बलात्कार के मामले में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न सिर्फ कर्नाटक बल्कि पूरे देश की राजनीति को झकझोर दिया है।
क्या है मामला?
पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना पर आरोप था कि उन्होंने अपने फार्महाउस में काम करने वाली 47 वर्षीय घरेलू सहायिका के साथ बलात्कार किया। इस वारदात को प्रज्वल ने अपने ही मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया था, जो बाद में उनके खिलाफ एक महत्वपूर्ण सबूत बना। इसके अलावा पीड़िता की साड़ी पर मिले डीएनए नमूने भी कोर्ट में निर्णायक साक्ष्य साबित हुए। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और ₹5 लाख का जुर्माना लगाया।
एक उभरते सितारे का शर्मनाक पतन
प्रज्वल रेवन्ना को कुछ साल पहले तक भारतीय राजनीति का उभरता सितारा माना जाता था। वे पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के वरिष्ठ नेता एच.डी. रेवन्ना के बेटे हैं। उनका जन्म 5 अगस्त 1990 को हासन में हुआ था। राजनीति में प्रवेश से पहले उन्होंने बैंगलोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और उद्यमिता तथा कृषि क्षेत्र में सक्रिय रहे।
राजनीतिक सफर
प्रज्वल ने 2014 में जनता दल (सेक्युलर) से राजनीति में कदम रखा और 2019 में हासन से सांसद चुने गए। वे उस समय 17वीं लोकसभा में पार्टी के अकेले और सबसे युवा सांसद थे। संसद में उन्होंने ग्रामीण बुनियादी ढांचा, जल संरक्षण और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर विशेष रुचि दिखाई।
लेकिन 2023 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने संपत्ति छुपाने और चुनावी गड़बड़ियों के चलते उनके चुनाव को शून्य और अमान्य घोषित कर दिया।
विवाद और गिरफ्तारी
2024 की शुरुआत में प्रज्वल रेवन्ना पर महिलाओं के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे। कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर सहमति के बिना रिकॉर्ड की गई घटनाएं शामिल थीं। एफआईआर दर्ज होने से ठीक पहले वे राजनयिक पासपोर्ट के जरिए देश से भाग गए। बाद में भारत सरकार के प्रयासों से इंटरपोल नोटिस जारी हुआ और उन्हें भारत वापस लाया गया।
जून 2024 में बेंगलुरु लौटने के बाद उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और अब अदालत ने उन्हें बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
करोड़ों की संपत्ति के मालिक
2023 में दाखिल शपथपत्र के अनुसार प्रज्वल रेवन्ना के पास लगभग ₹30–35 करोड़ की संपत्ति थी:
- ₹10 करोड़ की कृषि भूमि
- ₹8–10 करोड़ की आवासीय संपत्ति
- ₹2 करोड़ से अधिक के बैंक जमा
- ₹1.5 करोड़ की लक्ज़री गाड़ियां
प्रधानमंत्री मोदी ने किया था प्रचार
2019 के चुनाव में प्रज्वल रेवन्ना के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रचार किया था, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी। लेकिन अब वही नेता भारतीय राजनीति के सबसे शर्मनाक अध्याय का हिस्सा बन चुके हैं।
जनता दल (सेक्युलर) की स्थिति शर्मनाक
पार्टी के लिए यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत बदनामी नहीं बल्कि नैतिक और राजनीतिक संकट बन चुका है। वर्षों से वोक्कालिगा समुदाय और ग्रामीण कर्नाटक की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी को अब अपने ही परिवार के सदस्य के कारण सार्वजनिक शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है।
यह मामला भारतीय राजनीति में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
यह एक ऐसा घटनाक्रम है जिसने सत्ता, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग की सीमाओं को उजागर कर दिया है।
