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फर्जी दस्तावेजों के जरिए जालना के सर्वे 554 की 5 एकड़ जमीन हड़पने की कोशिश उजागर

अदालत के आदेश पर तत्कालीन भूमि अभिलेख उपअधीक्षक व उप-पंजीयक सहित 5 लोगों पर मामला दर्ज

जालना/कादरी हुसैन

जालना शहर के मंठा रोड स्थित डी-मार्ट के पास सर्वे क्रमांक 554 की कुल 11 एकड़ में से 5 एकड़ (कल्याणी ग्रीन्स) कृषि भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जालना न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है।

इस प्रकरण में मृतक की महिला वारिस संध्या राजेंद्र डागा, उनके पति राजेंद्र सोभागमल डागा (दोनों निवासी हिंगणघाट, जिला वर्धा) तथा पावर ऑफ अटॉर्नी धारक आशिष अशोक छाजेड (निवासी जालना) द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप है।

इसके अलावा जालना के तत्कालीन भूमि अभिलेख उपअधीक्षक रविंद्र मुथा और सेवानिवृत्त उप-पंजीयक बद्रीनाथ बी. वाडेकर पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप है। न्यायालय ने इन पांचों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके अनुसार कदीम जालना पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। दो वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता सामने आने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

मामले का विवरण :
अंकित अभयकुमार आबड (उम्र 33, निवासी नळगल्ली, जालना) कृषि व निर्माण व्यवसाय से जुड़े हैं। उनके दादा स्व. कचरुलाल आबड हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता थे। सर्वे नंबर 554 की 5 एकड़ जमीन को लेकर आबड परिवार और उनकी बहन संध्या डागा के बीच वर्ष 1986 से दीवानी विवाद चल रहा है।

दीवानी अपील क्रमांक 111/2020 तकनीकी कारणों से अप्रैल 2022 में खारिज होने के बाद आरोपियों ने इसका फायदा उठाया। संध्या डागा ने जमीन पर कब्जा न होते हुए भी 20 अगस्त 2021 को आशिष छाजेड के नाम फर्जी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की।

आरोप है कि तत्कालीन अधिकारी रविंद्र मुथा और बद्रीनाथ वाडेकर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस साजिश को अंजाम दिया। मुथा ने 6 मई 2022 को बिना किसी नोटिस के आबड परिवार का नाम हटाकर प्रॉपर्टी कार्ड में संध्या डागा का नाम दर्ज कर दिया। इसके तुरंत बाद उसी दिन उप-पंजीयक वाडेकर ने नियमों की अनदेखी करते हुए चार अलग-अलग बिक्री विलेख (रजिस्ट्रेशन क्रमांक 2310 से 2313) पंजीकृत कर दिए।

अंकित आबड ने नवंबर 2022 में पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन मामला दर्ज न होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत की जांच में सामने आया कि प्रॉपर्टी कार्ड से संबंधित मूल सरकारी फाइल रिकॉर्ड रूम से गायब है, जिससे रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई। साथ ही बिक्री दस्तावेजों के साथ संलग्न ले-आउट नक्शे और नगर नियोजन विभाग के आधिकारिक नक्शों में भी बड़ा अंतर पाया गया।

यह भी सामने आया कि वाडेकर ने रद्द किया हुआ पीआर कार्ड संलग्न किया था। न्यायाधीश आर. एम. देवर्षी ने टिप्पणी की कि यह केवल दीवानी विवाद नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कर किया गया आपराधिक कृत्य है। इसमें सरकारी अधिकारियों की भूमिका होने के कारण विस्तृत जांच आवश्यक है।

अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत कार्रवाई के आदेश दिए। मामले की प्रारंभिक जांच कदीम जालना पुलिस थाने की सहायक पुलिस निरीक्षक आरती जाधव ने की और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर यह मामला उजागर हुआ।

फिर्यादी की ओर से एडवोकेट दर्शित आबड ने पैरवी की, जबकि उन्हें मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ के एडवोकेट आशिष जाधवर और जालना के एडवोकेट पी. डब्ल्यू. कुलकर्णी का मार्गदर्शन मिला।

कार्रवाई :
न्यायालय के आदेशानुसार 24 अप्रैल 2026 को कदीम जालना पुलिस ने संध्या राजेंद्र डागा, राजेंद्र सोभागमल डागा, आशिष अशोक छाजेड, रविंद्र मुथा और बद्रीनाथ बी. वाडेकर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 120-बी और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

मामले की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक जनार्दन शेवाळे कर रहे हैं। राजस्व और पंजीयन विभाग के अधिकारियों पर मामला दर्ज होने से जिला प्रशासन में बड़ी हलचल मच गई है।

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