जालना में सीरत-ए-पाक अभियान का भव्य समापन, 70 विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित; 25 स्कूल-कॉलेजों के 15,350 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
मौलाना अज़हर मदनी बोले—पैगंबर मोहम्मद ﷺ की शिक्षाएं जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देने वाला रोशनी का मीनार हैं

जालना/कादरी हुसैन।
जमीयत उलमा अरशद मदनी, जिला जालना की ओर से आयोजित सीरत-ए-पाक अभियान 2026 के समापन पर सोमवार, 12 अक्टूबर को उर्दू हाई स्कूल, जालना के ग्रैंड हॉल में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। इस अभियान के अंतर्गत जिले के 25 स्कूलों और कॉलेजों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कुल 15,350 विद्यार्थियों ने भाग लेकर लाभ प्राप्त किया। अभियान के दौरान सीरत-ए-पाक विषय पर भाषण प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 70 विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीयत उलमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना हलीमुल्लाह क़ासमी ने की, जबकि जमीयत उलमा के उपाध्यक्ष मौलाना सैयद अज़हर मदनी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अनेक धार्मिक विद्वान, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, स्कूल-कॉलेजों के पदाधिकारी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद थे।
‘पैगंबर मोहम्मद ﷺ की शिक्षाओं पर चलकर जीवन को बेहतर बनाएं’
विशेष अतिथि मौलाना सैयद अज़हर मदनी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में कहा कि मुसलमानों को जो सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है, वह अल्लाह के रसूल हज़रत मोहम्मद ﷺ से उनके संबंध और उनकी शिक्षाओं के प्रति समर्पण से जुड़ी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, उसकी गरिमा और उसके आदर्शों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ﷺ की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने से इंसान को सही दिशा मिलती है और वह कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रह सकता है। उन्होंने सीरत-ए-पाक अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के दिलों में पैगंबर मोहम्मद ﷺ के प्रति प्रेम और सम्मान बढ़ाने तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
25 शिक्षण संस्थानों में आयोजित हुए कार्यक्रम
जमीयत उलमा जिला जालना के अध्यक्ष मौलाना सोहेल नदवी ने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पिछले डेढ़ महीने के दौरान जिले के 25 स्कूलों और कॉलेजों में सीरत-ए-पाक से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने भाषणों के माध्यम से पैगंबर मोहम्मद ﷺ के जीवन, शिक्षाओं और आदर्शों को प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिताओं में 302 विद्यार्थियों ने भाषण दिए। इनमें 22 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी, 23 ने द्वितीय श्रेणी और 25 ने तृतीय श्रेणी में सफलता प्राप्त की। इस प्रकार कुल 70 विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। मौलाना सोहेल नदवी ने अभियान को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी शिक्षण संस्थानों, उनके प्रबंधन और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
‘सीरत-ए-रसूल जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन देती है’
जमीयत उलमा महाराष्ट्र के समन्वयक मुफ्ती हफीजुल्लाह क़ासमी ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को पैगंबर मोहम्मद ﷺ की शिक्षाओं को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सीरत-ए-रसूल केवल धार्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण आदर्श प्रस्तुत करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इन शिक्षाओं को अपने व्यवहार और दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
जमीयत उलमा मराठवाड़ा के अध्यक्ष मुफ्ती मिर्ज़ा कलीम बेग नदवी ने जमीयत उलमा जिला जालना के कार्यों की सराहना करते हुए संगठन को धार्मिक और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में सक्रिय बताया। वहीं, जमीयत उलमा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष क़ारी अब्दुल रशीद हमीदी ने प्रतियोगिताओं में सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अध्यक्षीय संबोधन में पैगंबर मोहम्मद ﷺ की जीवनी की विशेषता पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मौलाना हलीमुल्लाह क़ासमी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में अनेक महान और प्रभावशाली व्यक्तित्व हुए हैं, लेकिन पैगंबर मोहम्मद ﷺ की जीवनी का हर पहलू सुरक्षित, विस्तृत और व्यवहारिक मार्गदर्शन के रूप में उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ﷺ के जीवन, आदतों, विचारों और कार्यों से इंसान को जीवन के विभिन्न चरणों में दिशा मिलती है। उनकी शिक्षाएं मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण आदर्श प्रस्तुत करती हैं। इसलिए विद्यार्थियों को सीरत-ए-पाक का अध्ययन कर उसके संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
उर्दू हाई स्कूल की भूमिका की सराहना
कार्यक्रम के दौरान जमीयत उलमा जिला जालना के उपाध्यक्ष और अंजुमन इशाअत-ए-तालीम, जालना के सचिव मुहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने अपने संस्थान तथा उर्दू हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी। उर्दू हाई स्कूल, जालना के प्राचार्य एवं मुख्याध्यापक नबील सर ने समारोह के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जमीयत उलमा के उपाध्यक्ष मौलाना ईसा खान काशिफी और संगठन के सचिव मुहम्मद क़ासिम एजाज़ सिद्दीकी ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद अतिथियों के हाथों अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए गए।
धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र की हस्तियों की उपस्थिति
समारोह में जमीयत उलमा महाराष्ट्र के कोषाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद इश्तियाक क़ासमी, मौलाना अब्दुल रऊफ नदवी, मुफ्ती अनीसुर रहमान नदवी, मुफ्ती कौसर आफाक़, मौलाना इब्राहिम नदवी, मौलाना इमरान खान नदवी, हाफिज अब्दुल हफीज, हाफिज शेर खान, हाफिज उबैद फैज़ी और मौलाना सलीम बैती सहित विभिन्न क्षेत्रों के धार्मिक विद्वान उपस्थित रहे।
इसके अलावा जालना के वरिष्ठ नेता इक़बाल पाशा, पत्रकार अब्दुल हफीज, अल-हुदा उर्दू हाई स्कूल के अध्यक्ष शेख अब्दुल वहीद, हाजी अहमद बिन सईद चाऊश, जमीयत इस्लामी महाराष्ट्र के सचिव शेख मुजीब, सर सैयद अहमद खान उर्दू स्कूल के अध्यक्ष इक़बाल कुरैशी, जमीयत उलमा जिला जालना के महासचिव अयूब खान, नगरसेवक इमरान खान उर्फ गुड्डू, नगरसेवक एडवोकेट मुहम्मद फारूक, एडवोकेट मुहम्मद अशफाक काग़ज़ी, हाजी मुहम्मद सलीम बावा, फैसल अल-अमोदी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
मुफ्ती अनीसुर रहमान नदवी ने कार्यक्रम का संचालन किया। विद्यार्थियों, अभिभावकों और गणमान्य अतिथियों से भरा हॉल अभियान के प्रति उत्साह का साक्षी बना। अंत में जमीयत उलमा शहर जालना के सचिव मुहम्मद क़ासिम एजाज़ सिद्दीकी ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। मौलाना सैयद अज़हर मदनी की दुआ के साथ समारोह का समापन हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जमीयत उलमा के सभी सदस्यों, विशेष रूप से मौलाना ईसा खान काशिफी, हाफिज अब्दुल सलाम, शारिक अनवर कुरैशी, अत्ता मुहम्मद बख्शी, एडवोकेट मुहम्मद अशफाक काग़ज़ी, मौलाना अब्दुल्ला सिराजी, मुफ्ती नोमान नदवी, हाफिज अब्दुल वाजिद, हाफिज अयूब अंसारी, बाबूभाई, एहतेशामुद्दीन बाग़बान और सैयद मुहम्मद एजाज़ सहित अन्य सदस्यों ने योगदान दिया।
