जालना में 13 वर्षीय बच्चे के अपहरण और 5 करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में बड़ा फैसला, विधि संघर्षरत बालक को 6 महीने सामुदायिक सेवा का आदेश

जालना/कादरी हुसैन।
जालना के बाल न्याय मंडल ने 13 वर्षीय बच्चे का अपहरण कर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के गंभीर मामले में 12 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मंडल ने विधि संघर्षरत बालक को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 364-A, 323, 506, 34 और 120-B के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने तक सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार, संबंधित बालक को जिला सामान्य अस्पताल, जालना के बच्चों के वार्ड में प्रत्येक सोमवार और बुधवार को सामुदायिक सेवा करनी होगी।
पांच करोड़ की फिरौती, रकम नहीं देने पर हत्या की धमकी
मामला 25 जून 2024 का है। शिकायतकर्ता ने सुबह करीब 8 बजे अपने 13 वर्षीय बेटे को साइकिल से स्कूल भेजा और स्वयं अपनी दुकान पर काम के लिए चले गए। सुबह करीब 11.45 बजे उनके मोबाइल पर एक फोन आया। फोन करने वाले ने दावा किया कि बच्चा उनके कब्जे में है और उसे सुरक्षित वापस पाने के लिए पांच करोड़ रुपये देने होंगे। रकम नहीं देने पर बच्चे की हत्या करने की धमकी भी दी गई।
फोन आने के बाद घबराए पिता तुरंत बच्चे के स्कूल पहुंचे। वहां कक्षा शिक्षक से पूछताछ करने पर पता चला कि बच्चा उस दिन सुबह स्कूल आया ही नहीं था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने जाल बिछाकर बच्चे को कराया मुक्त
शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी के मार्गदर्शन में पुलिस ने दो टीमें गठित कीं। पुलिस ने शिकायतकर्ता को साथ लेकर फिरौती की रकम सौंपने के बहाने आरोपियों को पकड़ने की योजना बनाई।
जब आरोपी रकम से भरा बैग लेने पहुंचे, तब पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान ओमनी कार में रखे गए बच्चे को सकुशल मुक्त कराया गया और उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
बंधक बनाकर मारपीट करने का भी आरोप
शिकायत के अनुसार, बच्चे को 25 जून 2024 की सुबह करीब 8 बजे से रात 8.30 बजे तक किसी अज्ञात स्थान पर बंधक बनाकर रखा गया था। इस दौरान उसके साथ थप्पड़ और मुक्कों से मारपीट की गई। आरोप है कि रूमाल से उसका मुंह और गला बांधकर रखा गया था। आरोपियों ने फिरौती की रकम नहीं मिलने पर एड्स से संबंधित बीमारी के स्टेरॉयड इंजेक्शन देकर उसकी हत्या करने की धमकी भी दी थी।
इस मामले में सदर बाजार पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक बी. बी. नरोडे ने बाल न्याय मंडल, जालना में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की।
17 गवाहों की गवाही से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार पक्ष की ओर से कुल 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें शिकायतकर्ता, पीड़ित बालक, पंच गवाह, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी और जांच अधिकारी बी. बी. नरोडे की गवाही महत्वपूर्ण रही। सहायक सरकारी अभियोक्ता अतिक इ. परकोटे ने सरकार पक्ष की ओर से पैरवी की।
बाल न्याय मंडल की प्रमुख दंडाधिकारी श्रीमती एस. एन. पुंड तथा सदस्य श्रीमती ए. एम. धन्नावत और श्री आर. बी. जगताप ने प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद विधि संघर्षरत बालक को संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। मंडल ने उसे छह महीने तक जिला सामान्य अस्पताल के बच्चों के वार्ड में प्रत्येक सोमवार और बुधवार को सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया।
पुलिस और अभियोजन पक्ष की अहम भूमिका
इस मामले की कार्रवाई में जालना के पुलिस अधीक्षक तेजबीर सिंह संधू, अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम साळी, पुलिस उपअधीक्षक अनंत कुलकर्णी और सदर बाजार पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक संदीप भारती के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। न्यायालयीन पैरवी अधिकारी पुलिस हेड कांस्टेबल फिरोज खान ने भी मामले की कार्रवाई में सहयोग किया।
