मियां साहब दरगाह परिसर में गंदगी से परेशान नागरिकों ने चंदा जुटाकर बुलाई जेसीबी, महानगरपालिका की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

जालना/कादरी हुसैन
जालना शहर के प्रसिद्ध मियां साहब दरगाह परिसर में नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध की समस्या गंभीर होती जा रही है। नालियों के चेंबर जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और दरगाह में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि समस्या को लेकर बार-बार शिकायत करने के बावजूद महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। आखिरकार परेशान होकर नागरिकों ने आपस में पैसे इकट्ठा किए और अपने खर्च पर जेसीबी मशीन बुलवाकर नालियों के जाम चेंबर और पाइप की सफाई करवाई।
इस घटना ने महानगरपालिका की स्वच्छता व्यवस्था और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब शहर की सफाई की जिम्मेदारी महानगरपालिका की है, तो लोगों को अपने ही परिसर की नालियां साफ करवाने के लिए जेब से पैसे खर्च क्यों करने पड़ रहे हैं?
मियां साहब दरगाह परिसर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में गंदा पानी जमा होना और दुर्गंध फैलना स्वच्छता के साथ-साथ जनस्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
इस मामले में संबंधित स्वच्छता निरीक्षक और सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वार्ड में नियमित निरीक्षण, नालियों की सफाई और नागरिकों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करना संबंधित विभाग का दायित्व है। यदि समय पर निगरानी और सफाई की जाती, तो नागरिकों को स्वयं जेसीबी बुलवाने की जरूरत नहीं पड़ती।
नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त से मामले का संज्ञान लेने, दरगाह परिसर की नालियों की स्थायी समस्या दूर करने, नियमित सफाई सुनिश्चित करने और संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि महानगरपालिका प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। मियां साहब दरगाह परिसर की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रशासन कब ठोस कार्रवाई करेगा, ताकि नागरिकों को अपनी जेब से सफाई करवाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
