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तेलंगाना में बीसी आरक्षण पर गरमाई सियासत: किशन रेड्डी बोले – मुस्लिमों को आरक्षण देना असंवैधानिक, BJP करेगी आंदोलन

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग (बीसी) को 42% आरक्षण देने की घोषणा पर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री और तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को इसमें 10% हिस्सा देने के फैसले को लेकर। रेड्डी ने इसे धर्म आधारित आरक्षण करार देते हुए संविधान विरोधी बताया है।

“धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं”

किशन रेड्डी ने कहा कि,

“हमारा संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। कांग्रेस सरकार बीसी आरक्षण के नाम पर मुस्लिमों को शामिल कर बीसी वर्गों के अधिकारों का हनन कर रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि बीसी आबादी राज्य में 51% है, लेकिन कांग्रेस सरकार इन्हें केवल 32% आरक्षण दे रही है, वहीं 12% मुस्लिम आबादी को 10% आरक्षण देने की योजना बनाई गई है। रेड्डी ने इसे बीसी समुदाय के साथ धोखा और सोची-समझी साजिश बताया।

बीजेपी का राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

बीजेपी नेता ने साफ किया कि अगर कांग्रेस सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो पार्टी पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सच्चे सामाजिक न्याय की पक्षधर है और एससी, एसटी व बीसी को संवैधानिक दायरे में रहते हुए आरक्षण दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है।


बिहार चुनाव पर भी दी प्रतिक्रिया: नीतीश को बताया ईमानदार मुख्यमंत्री

किशन रेड्डी ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ईमानदार और भ्रष्टाचार-मुक्त नेता बताया और कहा कि बिहार की जनता एक बार फिर उन्हें सत्ता में देखना चाहती है।

“एनडीए, नीतीश कुमार के नेतृत्व में एकजुट है और बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनता से अपील है कि वे स्थिरता और प्रगति के लिए एनडीए को समर्थन दें।”


निष्कर्ष

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के बीसी आरक्षण में मुस्लिम समुदाय को शामिल करने के निर्णय ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। बीजेपी इसे धर्म आधारित और संविधान विरोधी बता रही है, जबकि कांग्रेस सामाजिक संतुलन की बात कर रही है। अब देखना यह है कि यह मुद्दा आगामी दिनों में किस दिशा में जाता है — राजनीतिक टकराव, कानूनी चुनौती या सामाजिक आंदोलन

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