जालना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में महायुति पार्टियों की नज़र मुस्लिम वोटरों पर, पहली बार BJP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे

जालना/कादरी हुसैन
जालना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (JMC) के चुनाव 15 जनवरी को होने जा रहे हैं और उससे पहले शहर की राजनीति में अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बार महायुति की सभी प्रमुख पार्टियों की रणनीति का केंद्र मुस्लिम वोटर बनकर उभरा है। खास बात यह है कि पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जालना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
शुरुआत में BJP, शिवसेना (शिंदे गुट) और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के एकजुट होकर चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर मतभेद बढ़ने के कारण महायुति बिखर गई। इसके बाद तीनों दल अलग-अलग चुनावी मैदान में उतर गए, जिससे मुस्लिम-बहुल वार्डों में मुकाबला और तेज हो गया है।
इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना यह मानी जा रही है कि BJP ने मुस्लिम-बहुल इलाकों में चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। जालना शहर के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब BJP ने नगर निगम चुनाव में मुस्लिम समुदाय को सीधी भागीदारी दी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस फैसले के पीछे कांग्रेस के पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल की भूमिका अहम मानी जा रही है, जो हाल ही में BJP में शामिल हुए हैं और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटे हैं।
जालना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कुल 16 वार्ड हैं और यहां से 65 कॉर्पोरेटर चुने जाएंगे। शहर में लगभग 2.45 लाख मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम वोटरों की हिस्सेदारी करीब 20 से 25 प्रतिशत बताई जाती है। वार्ड क्रमांक 2, 4, 10 और 11 में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक अर्जुन खोतकर ने भी मुस्लिम वोटरों पर फोकस करते हुए सात मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। खोतकर और कैलास गोरंट्याल के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता मानी जाती है और दोनों ही नगर निगम पर अपना प्रभाव कायम करने की कोशिश में हैं। वहीं, NCP (अजीत पवार गुट) ने कुल 55 उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिनमें 17 मुस्लिम शामिल हैं, जिसे अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी तरफ, महा विकास अघाड़ी (MVA) कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और NCP (शरद पवार गुट) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने 51 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें 19 मुस्लिम हैं। शिवसेना (उभाठा) ने 13 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है, जबकि NCP (शरद पवार गुट) ने दो मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
इसके अलावा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी मुस्लिम-बहुल इलाकों में 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को और त्रिकोणीय बना दिया है। पार्टी का दावा है कि जनता पारंपरिक दलों से अलग विकल्प की ओर देख रही है।
एक ही वोट बैंक पर कई पार्टियों की दावेदारी के चलते जालना म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव बेहद रोचक और कड़ा होने की संभावना है। 15 जनवरी का मतदान नगर निगम की सत्ता के साथ-साथ शहर की आगामी राजनीतिक दिशा भी तय करेगा।
