FIR के बावजूद निलंबन नहीं, जिला परिषद के रवैये पर उठे सवाल; आरोपी विस्तार अधिकारी के खिलाफ आमरण अनशन

धाड़ | आबिद लाला
बुलढाणा जिला परिषद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अन्याय अत्याचार विरोधी समिति के जिलाध्यक्ष जाकिर मिर्जा ने आरोपी विस्तार अधिकारी रवींद्र किसनराव बोबडे के तत्काल निलंबन की मांग को लेकर जिला परिषद कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
मामला सरकारी दस्तावेज गायब करने और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की कथित अवहेलना से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन ग्राम सेवक, धाड़ और वर्तमान विस्तार अधिकारी, मलकापुर, रवींद्र बोबडे के खिलाफ सरकारी रिकॉर्ड गायब कर उसे अवैध रूप से अपने कब्जे में रखने के आरोप में धाड़ पुलिस थाने में FIR क्रमांक 0233/2026 दर्ज की गई है। यह मामला BDO के आदेश के बाद दर्ज हुआ बताया गया है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि FIR दर्ज हुए 61 दिन बीत जाने के बावजूद जिला परिषद प्रशासन ने संबंधित अधिकारी को निलंबित नहीं किया है। उनका कहना है कि प्रशासन केवल कारण बताओ नोटिस तक सीमित रहकर मामले को टाल रहा है।
जाकिर मिर्जा ने सवाल उठाया है कि जब मामले में FIR दर्ज है और कथित तौर पर ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, तो प्रशासन कार्रवाई करने में देरी क्यों कर रहा है? उन्होंने इस देरी के पीछे किसी संभावित लेन-देन की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आंदोलनकारियों ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि आरोपी अधिकारी के पद पर बने रहने से विभागीय अथवा पुलिस जांच प्रभावित हो सकती है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रह सकती है।
प्रमुख मांगों में FIR के आधार पर विस्तार अधिकारी रवींद्र बोबडे को तत्काल निलंबित करना, नोटिस के जवाब का इंतजार किए बिना संबंधित नियमों के तहत विभागीय जांच शुरू करना तथा मामले में निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना शामिल है।
जाकिर मिर्जा ने चेतावनी दी है कि यदि आमरण अनशन के दौरान उनके स्वास्थ्य को कोई नुकसान पहुंचता है अथवा कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी जिला परिषद प्रशासन की होगी।
अब देखना यह है कि FIR और लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जिला परिषद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आंदोलनकारियों की मांगों पर कब तक निर्णय लिया जाता है।
