पिशोर: बाल चित्रकारों ने चित्रों के माध्यम से दिया सड़क सुरक्षा का संदेश

कन्नड़ | अशरफ़ अली
औरंगाबाद ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन तथा यातायात शाखा के समन्वय से पिशोर पुलिस थाने की पहल पर थाना क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में यातायात जागरूकता चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करने तथा विद्यार्थियों में यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में कक्षा 5वीं से 10वीं तक के लगभग 300 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतियोगिता के लिए ‘यातायात नियमों का पालन करें, दुर्घटनाओं को रोकें’ तथा ‘हेलमेट और सीट बेल्ट जीवन के सुरक्षा कवच हैं’ विषय दिए गए थे। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से यातायात नियमों का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व तथा सड़क सुरक्षा के संदेशों को चित्रों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता में महात्मा ज्योतिबा फुले माध्यमिक विद्यालय, पिशोर, समता माध्यमिक विद्यालय, पिशोर, मथुरामाता माध्यमिक विद्यालय, जिला परिषद माध्यमिक विद्यालय, चिंचोली लिंबाजी तथा जिला परिषद माध्यमिक विद्यालय, नाचनवेल के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर सहायक पुलिस निरीक्षक कुणाल सूर्यवंशी ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा, “यातायात नियम केवल दंड से बचने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं तथा दूसरों के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए हैं। विद्यार्थियों में यह जागरूकता बचपन से ही विकसित हो, इसी उद्देश्य से इस चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।”
प्रतियोगिता के बाद विद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट चित्रों का चयन किया जाएगा। इनमें से 23 उत्कृष्ट चित्रों को अगले चरण के लिए भेजा जाएगा। 4 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे तक इन चित्रों को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की यातायात शाखा में जमा किया जाएगा। चयनित चित्रों को पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कला दीर्घा में एक महीने तक प्रदर्शित किया जाएगा। उत्कृष्ट विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
सड़क दुर्घटना जागरूकता चित्रकला प्रतियोगिता के अंतर्गत पिशोर पुलिस थाने की ओर से प्रत्येक सहभागी विद्यालय के प्रथम तीन विजेता विद्यार्थियों को भी पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में यातायात अनुशासन की भावना विकसित होने के साथ ही सड़क सुरक्षा का संदेश समाज तक पहुंचाने में निश्चित रूप से सहायता मिलेगी।
