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औरंगाबाद महापालिका स्थायी समिति की बैठक में भाजपा-एमआईएम नगरसेवकों में तीखी बहस, अजहर पठाण को बाहर निकालने की चेतावनी

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा 

औरंगाबाद महापालिका की सर्वसाधारण सभा हो या स्थायी समिति की बैठक, सत्ताधारी भाजपा और एमआईएम के नगरसेवकों के बीच खींचतान अब आम बात हो गई है। विभिन्न मुद्दों पर विवाद, बहस और आरोप-प्रत्यारोप के कारण कई बार महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। शुक्रवार (4 सितंबर) को स्थायी समिति की बैठक में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

स्थायी समिति की बैठक में एमआईएम नगरसेवक अजहर पठाण और भाजपा नगरसेवक राजगौरव वानखेडे, सुरेंद्र कुलकर्णी तथा सभापति अनिल मकरिये के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। अजहर पठाण को अपनी बात रखने से रोकने के प्रयास के बावजूद वे लगातार बोलते रहे। स्थिति बिगड़ती देख सभापति ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि वे नहीं बैठे तो उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया जाएगा।

बैठक में अजहर पठाण ने शहर में महापालिका की ओर से चल रही अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने अवैध प्लॉटिंग से जुड़े लेन-देन, व्हाइट मनी और ब्लैक मनी, सरकारी दर तथा इससे महापालिका को होने वाले नुकसान जैसे विभिन्न मुद्दे उठाए।

पठाण जब इस विषय पर विस्तार से जानकारी दे रहे थे, तभी सभापति अनिल मकरिये ने उन्हें रोकते हुए कहा कि अनावश्यक चर्चा न करें और मुद्दे तक सीमित रहें। उन्होंने संक्षेप में अपनी बात रखने तथा व्यक्तिगत विषय सदन में नहीं लाने की हिदायत दी।

हालांकि, अजहर पठाण ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि वे बोलेंगे और बैठेंगे नहीं। इस पर भाजपा नगरसेवक सुरेंद्र कुलकर्णी ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि ब्लैक मनी, व्हाइट मनी और सरकारी दर का इस विषय से क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि सदन में जनता से जुड़े मुद्दों और विकास के विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।

इसी दौरान भाजपा नगरसेवक राजगौरव वानखेडे ने भी एमआईएम का नाम लेते हुए जोरदार जवाब दिया। इस पर अजहर पठाण ने पार्टी का नाम लिए जाने पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों के बीच शाब्दिक विवाद और बढ़ गया।

सभापति अनिल मकरिये ने पठाण को विषय समाप्त करने की सूचना दी, लेकिन उन्होंने अपनी बात जारी रखी। स्थिति को देखते हुए सभापति ने उन्हें नीचे बैठने के लिए कहा। इसके बावजूद नहीं मानने पर उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे सदन की कार्यवाही में सहयोग नहीं करते हैं तो उन्हें सभागृह से बाहर निकाल दिया जाएगा।

सभापति की चेतावनी के बाद अजहर पठाण शांत होकर अपनी कुर्सी पर बैठ गए। इस दौरान सदन में एमआईएम के तीन अन्य नगरसेवक भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं किया।

स्थायी समिति की बैठक में कुछ समय तक चले इस विवाद के कारण सदन का माहौल काफी गरमा गया था।

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