कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन में FRS पर सवाल, जेल में बंद 25 लोगों की भी हुई पहचान!

नई दिल्ली | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अपराधियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का इस्तेमाल किया था। अब इसी सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान FRS ने 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की, जिनका पुलिस के अनुसार आपराधिक रिकॉर्ड से मिलान हुआ था। हालांकि, द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में इनमें से कम से कम 25 लोग ऐसे पाए गए, जो गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे थे और पहचान किए जाने के समय जेल में बंद थे।
इन 25 लोगों में हत्या के 17 आरोपी, बलात्कार के 4 आरोपी और हत्या के प्रयास के 4 आरोपी शामिल बताए गए हैं। ये लोग उस समय दिल्ली की तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में बंद थे।
पुलिस के मुताबिक, 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर FRS के जरिए 2,873 लोगों की पहचान हुई। इनमें 2,402 लोगों का मिलान दिल्ली पुलिस के बायोमेट्रिक डेटाबेस ‘क्राइम कुंडली’ से और 471 लोगों का मिलान आपराधिक रिकॉर्ड से होने का दावा किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन से जुड़ी सभी FIR रद्द कर दी हैं। हालांकि, पुलिस को FRS के जरिए पहचाने गए 2,873 लोगों के संबंध में आगे बढ़ने की अनुमति दी गई है। पुलिस का कहना है कि केवल FRS के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, बल्कि पहले मौके पर जाकर फील्ड वेरिफिकेशन किया जाता है।
FRS की सटीकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। सिस्टम की कार्यक्षमता कैमरे के एंगल, रोशनी, तस्वीर की गुणवत्ता, चेहरे पर मास्क और पुलिस डेटाबेस जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। जेल में बंद लोगों का प्रदर्शन स्थल से जुड़ी FRS सूची में सामने आना अब सिस्टम की विश्वसनीयता और पहचान प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
