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बाब-अल-मंदेब के करीब पेरिम द्वीप पर हूतियों का कब्जा, सऊदी अरब की बढ़ी चिंता

यमन | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा

यमन में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित पेरिम द्वीप पर ईरान समर्थित हूती लड़ाकों के कब्जे की खबर से पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस द्वीप पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती अब बाब-अल-मंदेब से होने वाले समुद्री आवागमन को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए इसका विशेष महत्व है। ऐसे में इस जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की लंबे समय तक बाधा का असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

पेरिम द्वीप पर हूतियों के कब्जे को सऊदी अरब के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने हूती लड़ाकों की कार्रवाई की सराहना की है। हालांकि, इसी बीच ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच बातचीत पर जोर देते हुए कहा है कि सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए लाल सागर का समुद्री मार्ग खुला रहना चाहिए।

लाल सागर के बाद बाब-अल-मंदेब पर बढ़ा खतरा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ईरान की ओर से पहले चेतावनी दी जा चुकी थी कि यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो बाब-अल-मंदेब में भी समुद्री आवागमन को बाधित किया जा सकता है।

अब यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की बढ़ती पकड़ ने इस आशंका को और गंभीर बना दिया है। पिछले दो दिनों में हूती लड़ाकों ने यमन की सरकारी सेना से लाल सागर के कई रणनीतिक ठिकानों पर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया है। तटवर्ती शहर धुबाब पर भी हूतियों के कब्जे की खबर है।

इससे पहले गुरुवार को हूतियों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोचा पर नियंत्रण हासिल किया था। इसके बाद शुक्रवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने मोचा शहर के हवाई अड्डे को निशाना बनाकर बमबारी की। इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को नुकसान

हूती लड़ाकों और सऊदी अरब समर्थित सुरक्षा बलों के बीच जारी संघर्ष के दौरान सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की खबर भी सामने आई है। पाइपलाइन के आसपास से घना काला धुआं उठता दिखाई देने की जानकारी है।

यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल परिवहन ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको भी इसके माध्यम से अपने तेल की आपूर्ति और निर्यात व्यवस्था संचालित करती है। सऊदी अरब के सरकारी मीडिया के अनुसार, शुक्रवार देर रात पाइपलाइन से तेल की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई।

30 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंचा सऊदी तेल निर्यात

लाल सागर में समुद्री यातायात को लेकर पैदा हुई बाधाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट का असर सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ने का दावा किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण सऊदी अरब का तेल निर्यात लगभग 60 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर करीब 23 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह गिरावट सऊदी अरब के तेल निर्यात को लगभग तीन दशकों के सबसे निचले स्तर तक ले जाने वाली बताई जा रही है।

अगर होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक आवागमन बाधित होता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री परिवहन, बीमा लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

एमबीएस ने ट्रंप से मांगी सैन्य मदद

हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और बाब-अल-मंदेब के नजदीक उनके प्रभाव को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है। इसी बीच सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर सैन्य सहायता की मांग की है।

बताया जा रहा है कि गुरुवार को दोनों नेताओं के बीच दो बार बातचीत हुई। हालांकि, ट्रंप ने फिलहाल क्षेत्र में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है। अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार बताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिका पश्चिम एशिया में स्थिति को और जटिल बनाने से बचना चाहता है। हालांकि, यदि हूतियों की ओर से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को गंभीर रूप से बाधित किया जाता है, तो अमेरिका हूती ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

पेरिम द्वीप पर हूतियों की बढ़ती पकड़ और बाब-अल-मंदेब के आसपास उनकी सैन्य मौजूदगी ने पश्चिम एशिया के संघर्ष को एक नए रणनीतिक मोड़ पर ला दिया है। आने वाले दिनों में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहने वाली है।

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