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ना पार्टी, ना पैसा… अब जनता लाएगी अपना नेता खुद!” “औरंगाबाद से उठी एक तहरीक – जो बदल सकती है हिंदुस्तान की सियासत

खान एजाज़ अहमद सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक तहरीक, एक सोच और एक इंकलाब का नाम है। वो मौजूदा सियासत के खोखले ढांचे को बदलकर एक नया इतिहास तामीर करना चाहते हैं। उनका कहना है, “अगर मुझे वतन और अवाम की खिदमत करनी है तो मुझे ना किसी पार्टी की छांव चाहिए, ना शोर-शराबा और ना ही लाखों-करोड़ों खर्च करके सत्ता में आने का शौक है।” मेरा मकसद साफ है — मैं इसलिए मैदान में उतरता हूं ताकि लोगों की बला, जिल्लत और परेशानियों का हल निकाल सकूं।

खान एजाज़ अहमद का यकीन है कि अवाम को अब समझदारी दिखाते हुए ऐसे किरदार को चुनना चाहिए, जो सिर्फ वादे ना करे बल्कि खामोशी से अपने काम से सबूत पेश करे। उनका मानना है कि जो लोग उनकी इस फिक्र और सच्चे इरादों से मुतास्सिर हैं, उन्हें ऐसे ही जज़्बे वाले उम्मीदवार को बगैर किसी हिचकिचाहट के अपना भरपूर साथ देना चाहिए।

औरंगाबाद की सियासत और समाजी हलकों में खान एजाज़ अहमद एक जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं। वो सालों से अवाम की मुश्किलात को आवाज़ दे रहे हैं — कभी सड़कों पर उतरकर, कभी दफ्तरों में जाकर, और कभी हुकूमत से दो-दो हाथ करके। उन्होंने ये साबित किया है कि एक फिक्रमंद इंसान, जब इरादा कर ले, तो बिना किसी ओहदे या पार्टी के भी अवाम की भलाई का काम कर सकता है।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने औरंगाबाद सीट से आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 23 उम्मीदवारों के बीच पांचवां मुकाम हासिल किया। ये नतीजा उनके जनसमर्थन और उनके नजरिए की तस्दीक करता है।

अब खान एजाज़ अहमद ने 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। वो एक बार फिर अवाम के दरमियान अपनी मौजूदगी को और मजबूती से दर्ज कर रहे हैं, ताकि उनकी आवाज़ संसद तक पहुंच सके — बगैर किसी झुकाव, बगैर किसी सौदेबाज़ी।

क्योंकि अब वक़्त है उस सियासत का जो सिर्फ कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि क़ौम और अवाम के लिए जिये।

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