अण्णा हजारे की नाराजगी और केजरीवाल की हार: ‘सामना’ ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) की हार के बाद, वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे के बयान सुर्खियों में हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के मुखपत्र सामना के संपादकीय में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
सामना ने लिखा, “रालेगण सिद्धि के अण्णा हजारे को महात्मा अण्णा बनाने में अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों की अहम भूमिका थी। अण्णा को राष्ट्रीय पहचान तब मिली जब केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया।”
अण्णा हजारे की नाराजगी और आरोप
अण्णा हजारे ने साफ शब्दों में कहा कि अरविंद केजरीवाल के विचार और चरित्र शुद्ध नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “दिल्ली में शराब नीति घोटाले के कारण उनकी छवि धूमिल हुई।” अण्णा ने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार केजरीवाल को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।
मोदी-शाह की जीत और केजरीवाल की हार
संपादकीय में यह भी लिखा गया कि “पिछले दस वर्षों में अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल्ली की राजनीति में कड़ी चुनौती दी और शाह-मोदी की रणनीतियों को कई बार मात दी। लेकिन अब आखिरकार विभिन्न राजनीतिक चालों के जरिए मोदी-शाह ने यह जीत हासिल की।”
मोदी पर भी सवाल
शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए पूछा, “जब मोदी सरकार आज केजरीवाल की आलोचना कर रही है, तो उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने अण्णा हजारे के कौन से विचार आगे बढ़ाए?”
क्या अण्णा आंदोलन की विरासत खत्म हो गई?
संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि अण्णा हजारे के आंदोलन ने कांग्रेस सरकार को हिला दिया था, लेकिन अब खुद अण्णा हजारे ने ही केजरीवाल का विरोध कर दिया है।
AAP की हार और अण्णा हजारे की नाराजगी ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। क्या केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य पर यह सबसे बड़ा संकट है? यह देखने वाली बात होगी।
