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जालना नगर निगम का बड़ा फैसला: पार्षदों के रिश्तेदारों की दखलंदाजी पर सख्त रोक

जालना | कादरी हुसैन

जालना नगर निगम ने प्रशासनिक कार्यों में पार्षदों के रिश्तेदारों के बढ़ते हस्तक्षेप पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण कार्यालयीन परिपत्रक जारी किया है। नगर निगम आयुक्त अंजली शर्मा (भा.प्र.से.) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम के प्रशासनिक कार्यों और निर्णय प्रक्रिया में केवल निर्वाचित पार्षद एवं पार्षदाएं ही अधिकृत जनप्रतिनिधि हैं। उनके किसी भी रिश्तेदार को प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

नगर निगम के अनुसार, प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ पार्षदों के पति, पत्नी, पिता, भाई, पुत्र तथा अन्य रिश्तेदार मुख्यालय, प्रभाग कार्यालयों और विकास कार्यों के स्थलों पर पहुंचकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कामकाज में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

परिपत्रक में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ लोग स्वयं को पार्षद बताकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, अधिकारियों व कर्मचारियों को पार्षद बनकर फोन कर रहे हैं, कार्यालयों में पार्षद के अधिकार से प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं तथा निजी संस्थानों में भी स्वयं को पार्षद के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। नगर निगम ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा है कि ऐसी गतिविधियां निगम की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

आयुक्त ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्वाचित पार्षदों का पूरा सम्मान करें, लेकिन उनके रिश्तेदारों के किसी भी मौखिक निर्देश का पालन न करें। किसी भी प्रकार के दबाव में आकर कानून और नियमों के विरुद्ध कोई कार्य न किया जाए तथा प्रशासनिक प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार न किया जाए।

हालांकि, यदि कोई रिश्तेदार सामान्य नागरिक के रूप में अपने वैध कार्यालयीन कार्य के लिए नगर निगम आता है, तो उसका कार्य नियमानुसार और बिना किसी भेदभाव के किया जाएगा।

नगर निगम ने सभी पार्षदों एवं पार्षदाओं से भी अपील की है कि वे अपने पति, पत्नी, पिता, भाई, पुत्र तथा अन्य परिजनों को इस आदेश की जानकारी दें, ताकि प्रशासनिक अनुशासन बना रहे और नगर निगम की गरिमा एवं पारदर्शिता कायम रहे।

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