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औरंगाबाद  महानगर पालिका में नगरसेवकों के रिश्तेदारों के दखल पर रोक, आयुक्त अमोल येडगे के सख्त निर्देश

औरंगाबाद  | प्रतिनिधि 

औरंगाबाद: औरंगाबाद नगर निगम में कुछ महिला पार्षदों के पति, देवर, बेटे और दामाद द्वारा स्वयं को पार्षद बताकर प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने की शिकायतों के बाद नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। नगर आयुक्त अमोल येडगे ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब पार्षदों या पार्षदाओं के रिश्तेदारों को नगर निगम के प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी।

आयुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि महिला पार्षदों के रिश्तेदारों द्वारा दिए गए किसी भी मौखिक आदेश या निर्देश का पालन न किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल जनता द्वारा निर्वाचित अधिकृत पार्षद और पार्षदाएं ही नगर निगम के कामकाज में भाग लेने तथा प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में अपनी राय रखने के अधिकार रखते हैं।

गौरतलब है कि 16 जून को प्रकाशित एक समाचार में महिला पार्षदों के रिश्तेदारों के बढ़ते हस्तक्षेप और नगर निगम कार्यालय में उनके प्रभाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। इसी खबर का संज्ञान लेते हुए आयुक्त अमोल येडगे ने मंगलवार को विशेष परिपत्र जारी कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई रिश्तेदार अपने नाम के आगे “पार्षद” लिखने लगे थे। वहीं 15 जून को नगर निगम स्कूलों के प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में भी कई महिला पार्षदों के रिश्तेदार स्वयं को “जीरो पार्षद” के रूप में प्रस्तुत करते हुए दिखाई दिए थे। आयुक्त के आदेश के बाद अब ऐसे लोगों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

आयुक्त ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पार्षद के रिश्तेदार को कोई व्यक्तिगत कार्य हो तो वह सामान्य नागरिक की तरह नगर निगम कार्यालय आए और नियमों के अनुसार ही उसका कार्य किया जाए। अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाए और किसी भी रिश्तेदार को विशेष सुविधा या अधिकार न दिया जाए।

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