औरंगाबाद लोकसभा की सियासत तेज, भाजपा में चुनावी तैयारियां शुरू; खान एजाज़ अहमद ने भी किया मैदान में उतरने का ऐलान

औरंगाबाद | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर औरंगाबाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच भाजपा ने बूथ स्तर पर चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी के पन्ना प्रमुखों के साथ मतदान केंद्रवार मतदाता सूची का अध्ययन किया जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्री अतुल सावे को प्रमुख चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हाल ही में जिला बैंक चुनाव में अतुल सावे की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने विशेष प्रयास किए। माना जा रहा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उनका जनसंपर्क बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनाव के दौरान महायुति में किसी प्रकार का मतभेद उत्पन्न होता है तो भाजपा के स्वतंत्र चेहरे के रूप में अतुल सावे को आगे किया जा सकता है।
अतुल सावे औरंगाबाद पूर्व विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पूरी तरह शहरी क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की उल्लेखनीय संख्या होने के कारण चुनावों में विभिन्न राजनीतिक रणनीतियां अपनाई जाती रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी मराठा मतों के संभावित ध्रुवीकरण को रोकने के लिए अलग राजनीतिक समीकरण बनाए गए थे। चुनावी परिणामों में अतुल सावे को मात्र 2,161 मतों के अंतर से जीत मिली थी।
अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का चुनावी समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। भाजपा नेतृत्व भी इस प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए है। साथ ही पार्टी में लोकसभा उम्मीदवार को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। पहले कुछ उद्योगपतियों और जिले से बाहर के चेहरों के नाम भी चर्चा में थे। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. भागवत कराड ने भी संभावित उम्मीदवारी के लिए सक्रिय प्रयास किए थे। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने के लिए भाजपा का फोकस फिलहाल अतुल सावे पर दिखाई दे रहा है।
इसी बीच अपनी अलग चुनावी संकल्पना के लिए पहचान रखने वाले लोकसभा चुनाव के सक्रिय नेता खान एजाज़ अहमद ने भी औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 23 उम्मीदवारों के बीच खान एजाज़ अहमद पांचवें स्थान पर रहे थे। राजनीतिक गलियारों में उनके चुनावी प्रभाव को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं। पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे की हार अथवा पूर्व सांसद इम्तियाज़ जलील की जीत का कारण उन्हें मान लिया जाता है। इसके साथ ही राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि औरंगाबाद की बहुकोणीय चुनावी लड़ाई में खान एजाज़ अहमद जैसे उम्मीदवारों की भूमिका को नज़रअंदाज़ करना प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
