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दरगाह बेस गिराने के बजाय मरम्मत कराई जाए! कादराबाद कमेटी अपने आय का हिसाब दे, वक्फ अधिनियम के तहत बकायेदारों, अतिक्रमणकारियों और कमेटी गठन की जांच की मांग

जालना | कादरी हुसैन

अब जालना शहर महानगरपालिका द्वारा स्थित कादराबाद दरगाह बेस को तत्काल हटाने के संबंध में कादराबाद दरगाह कमेटी और वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और अकीदतमंदों का कहना है कि ऐतिहासिक दरगाह बेस को गिराने के बजाय विशेषज्ञों की देखरेख में उसकी मरम्मत, संरचनात्मक मजबूती और संरक्षण कराया जाना चाहिए।

नागरिकों का कहना है कि हज़रत जानुल्लाह शाह साहब कादरी (र.अ.) की कादराबाद स्थित दरगाह के नाम पर लगभग 470 बीघा भूमि पर अनेक दुकानें एवं अन्य वक्फ संपत्तियां हैं, जिनसे प्रत्येक माह अच्छी-खासी आय प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त वक्फ बोर्ड से भी विभिन्न मदों में निधि उपलब्ध होती है। ऐसे में इस आय और निधि का उपयोग दरगाह बेस, पानी बेस, संरक्षण, सुरक्षा और विकास कार्यों पर किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदार वर्षों से अत्यंत कम किराये पर दुकानें संचालित कर रहे हैं, जबकि वही दुकानें आगे पोट किरायेदारी (सब-लेटिंग) के माध्यम से 8000/-,₹25,000, ₹40,000, ₹60,000 अथवा उससे अधिक मासिक किराये पर अन्य लोगों को दी जा रही हैं। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो इससे दरगाह एवं वक्फ संपत्तियों को मिलने वाले वास्तविक राजस्व का बड़ा हिस्सा बीच में ही रुक रहा है, जिससे वर्षों से करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।

नागरिकों ने मांग की है कि महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए कि किन-किन दुकानों में अवैध सब-लेटिंग की गई है, वास्तविक किराया कितना वसूला जा रहा है, दरगाह को कितना किराया प्राप्त हो रहा है तथा इस व्यवस्था से वक्फ संपत्तियों को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।

इसके अलावा कई किरायेदारों द्वारा वर्षों से बकाया किराया जमा न करने तथा कुछ वक्फ संपत्तियों पर कथित अतिक्रमण होने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं और कई लोगों इसके प्रॉपर्टी कार्ड भी बनालिए। इसलिए वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बकाया किराया न देने वालों को नोटिस जारी कर वसूली की जाए, अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई कर संपत्तियां खाली कराई जाएं तथा नई दुकानों के आवंटन में पारदर्शी खुली बोली (ओपन बिडिंग) की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि दरगाह की आय में वृद्धि हो और वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि दरगाह कमेटी के कुछ पदाधिकारियों के विरुद्ध पूर्व से एफआईआर एवं एनसीआर दर्ज होने की बात सामने आ रही है। इन मामलों की वास्तविक स्थिति क्या है तथा उनका कमेटी के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसकी भी सक्षम स्तर पर जांच किए जाने की मांग नागरिकों ने की है।

*[इसी प्रकार यह भी चर्चा है कि कमेटी के अध्यक्ष द्वारा जब से उनके ऊपर FIR दर्ज हुए तो अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में कथित रूप से कमेटी द्वारा वह इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। यदि ऐसा है, तो इस्तीफे की वास्तविक स्थिति, उसकी वैधता तथा संपूर्ण प्रक्रिया की भी महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।]*

नागरिकों ने यह मांग भी उठाई है कि वर्तमान दरगाह कमेटी के गठन की संपूर्ण प्रक्रिया की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि तत्कालीन वक्फ अधिकारी, जालना द्वारा जिन नामों का प्रस्ताव तैयार कर वक्फ कार्यालय औरंगाबाद स्थित मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजा गया था, अंतिम स्वीकृति के समय यदि उन नामों में किसी प्रकार का परिवर्तन किया गया है, तो उसकी भी आधिकारिक जांच होनी चाहिए। यह स्पष्ट किया जाए कि किन नामों की अनुशंसा की गई थी, किन नामों को अंतिम मंजूरी दी गई और यदि दोनों में अंतर है तो वह किन नियमों एवं आधारों पर किया गया।

साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि दरगाह कमेटी के गठन के समय वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) द्वारा निर्धारित शर्तों और नियमों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच कराई जाए। दरगाह की आय का नियमित ऑडिट कराया जाए और उसकी पूरी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि आय का उपयोग धार्मिक स्थल के रखरखाव, सुरक्षा और विकास कार्यों में पारदर्शी तरीके से हो सके।

नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि उपरोक्त आरोपों की जांच में कोई अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल को दरगाह कमेटी की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध वक्फ अधिनियम एवं लागू नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

इस बीच महानगरपालिका ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि संबंधित दरगाह बेस अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में है। यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई और कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित दरगाह कमेटी और वक्फ बोर्ड की होगी।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन, महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल और दरगाह कमेटी से अपील की है कि ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल संरचनात्मक जांच, मरम्मत और संरक्षण का कार्य शुरू किया जाए। साथ ही वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, किराया वसूली, कमेटी गठन, वित्तीय व्यवस्था तथा अन्य सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित किया जाए।

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