2740 करोड़ की पानीपुरवठा योजना, फिर भी औरंगाबादकरों को नहीं मिल रहा पानी

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
करीब 2740 करोड़ रुपये की नई जलापूर्ति योजना के बावजूद औरंगाबाद शहर के नागरिकों को बारिश के मौसम में भी नियमित पानी नहीं मिल रहा है। नलों से आने वाला पानी भी दुर्गंधयुक्त, पीला और काला होने की शिकायतें सामने आई हैं। इस मुद्दे को लेकर गुरुवार (27 अगस्त) को हुई नगर निगम की आमसभा में नगरसेवकों ने जमकर हंगामा किया।
महापौर समीर राजूरकर की अध्यक्षता में हुई आमसभा में एमआईएम के नगरसेवक मोहम्मद वाजेद मोहम्मद अय्यूब, वंचित के डॉ. कुणाल खरात, ठाकरे पक्ष के गुटनेता गणेश लोखंडे और सावित्री वाणी ने शहर की जल समस्या को प्रमुखता से उठाया।
गणेश लोखंडे ने कहा कि पडेगांव और मिटमिटा क्षेत्र में पहले मिलने वाली पानी की आपूर्ति अब बंद हो गई है, जबकि नंदनवन कॉलोनी में आधी रात को पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रोजाना 250 एमएलडी पानी मिलने का दावा किया जा रहा है, तो नागरिकों को आठ-आठ दिन तक पानी का इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
लोखंडे ने यह भी सवाल उठाया कि 350 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना की लागत बढ़कर 2740 करोड़ रुपये हो गई, फिर भी शहरवासियों को पर्याप्त पानी क्यों नहीं मिल रहा है?
इस पर भाजपा नगरसेवकों ने आपत्ति जताते हुए इसके लिए उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष को जिम्मेदार ठहराया। नगरसेवक राजगौरव वानखड़े ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे के कारण जलापूर्ति योजना का बंटाधार हुआ। इस आरोप के बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।
विपक्ष के नेता समीर साजेद बिल्डर ने ठाकरे पक्ष के गुटनेता गणेश लोखंडे का समर्थन करते हुए कहा कि वे गुटनेता हैं, इसलिए उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए।
स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरिये ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन शिवसेना के गुटनेता किशोर नागरे ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि यह आमसभा है, स्थायी समिति की बैठक नहीं। इसके बाद महापौर ने नगरसेवकों से एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप न लगाने और पुराने विवादों को न उठाने की अपील करते हुए माहौल शांत कराया।
नई जलापूर्ति योजना और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के कार्यों को लेकर नगरसेवकों की शिकायतों पर महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार इन कार्यों पर सदन में चर्चा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने नगरसेवकों को अपनी शिकायतें संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति के समक्ष रखने की सलाह दी।
नगरसेवक अमित भुईगळ ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हमें इस तरह डराया न जाए और जलापूर्ति योजना पर सदन में चर्चा की जाए। इस पर महापौर ने उन्हें सदन में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी।
इसके बाद सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को देखते हुए महापौर ने राष्ट्रगान शुरू कराया और आमसभा का कामकाज स्थगित कर दिया।
करीब 2740 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना के बावजूद औरंगाबाद के नागरिकों को नियमित और स्वच्छ पानी नहीं मिलना शहर की जल व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
