सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष अनुमति याचिका खारिज की, मौलाना मोहम्मद अली जौहर शिक्षण संस्था की भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का आदेश बरकरार

नवी दिल्ली | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
पठाण बनेखा नूरखा द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर एज्युकेशन सोसायटी, सिल्लोड, जिला औरंगाबाद के अध्यक्ष शेख मोहम्मद कैसर आज़ाद एवं अन्य के विरुद्ध दायर विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
यह याचिका मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ द्वारा 2 जुलाई 2026 को रिट याचिका क्रमांक 8431/2024 और 8446/2024 में दिए गए अंतिम निर्णय के विरुद्ध दायर की गई थी। 22 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले पर विचार करने और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने योग्य कोई त्रुटि नहीं मिली। इसके बाद विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने न्यायालय के संज्ञान में लाया कि संबंधित विषय पर एक नया शासन निर्णय (G.R.) जारी किया गया है। बताया गया कि यह शासन निर्णय उच्च न्यायालय के आदेश से एक दिन पहले जारी हुआ था, लेकिन अनजाने में इसे उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
याचिकाकर्ताओं की ओर से भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार संचालित न करने का अनुरोध भी किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद संस्था से जुड़े लोगों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नागरिकों में संतोष व्यक्त किया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका कम होगी। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कैसर आज़ाद शेख को विभिन्न स्तरों से बधाई दी जा रही है।
