नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, 165 लोगों की मौत; सैकड़ों अब भी लापता, 133 भारतीयों के भी गायब होने की खबर

काठमांडू | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को आई भीषण अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवा जिले से शुरू हुआ यह सैलाब देखते ही देखते कई इलाकों तक फैल गया। तेज बहाव ने घरों, बाजारों, सड़कों, पुलों, वाहनों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल पुलिस के 27 अगस्त सुबह के ताजा आंकड़ों के अनुसार नेपाल में अब तक 162 शव बरामद किए जा चुके हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में तीन मौतों की पुष्टि के बाद इस आपदा में नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में कुल मृतकों की संख्या कम से कम 165 हो गई है।
रसुवा से शुरू हुआ तबाही का सैलाब
सबसे ज्यादा तबाही रसुवा जिले के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और आसपास के क्षेत्रों में हुई। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का स्तर बढ़ने के बाद तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा और कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद बाढ़ का असर नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहूं और नवलपरासी पूर्व तथा पश्चिम तक दिखाई दिया। नेपाल पुलिस के अनुसार विभिन्न जिलों से शव बरामद किए गए हैं और नदी के किनारे तथा बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज अभियान जारी है।
बाढ़ के पीछे क्या कारण था?
शुरुआती जानकारी में इस आपदा को भूकंप और भूस्खलन से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद में उपलब्ध वैज्ञानिक और उपग्रह संबंधी प्रारंभिक जानकारी से संकेत मिला कि तिब्बत की ओर एक बर्फीले मलबे के खिसकने से नदी का मार्ग अस्थायी रूप से अवरुद्ध हुआ और वहां पानी जमा होने के बाद अचानक यह अवरोध टूट गया। इससे बेहद तेज गति से पानी और मलबे का सैलाब नीचे की ओर आया।
नेपाल के जल तथा मौसम विशेषज्ञों ने कहा है कि इस घटना के वास्तविक कारण की विस्तृत जांच अभी जारी है। प्रारंभिक आकलन में क्षेत्र में भारी बारिश को इस अचानक आई बाढ़ का मुख्य कारण नहीं माना गया है।
गांव, बाजार और सड़कें बर्बाद
बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का पर्याप्त समय नहीं मिला। कई स्थानों पर मकान और बाजार बह गए। नुवाकोट के कुछ इलाकों में सैकड़ों घरों के बह जाने या मलबे में दब जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रारंभिक सरकारी आकलन के अनुसार बाढ़ से कई महत्वपूर्ण पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। दर्जनों किलोमीटर सड़क मार्ग प्रभावित हुआ है और बिजली तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में संचार और बिजली व्यवस्था बाधित होने के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी तक नहीं हो पाया है।
सैकड़ों लोग अब भी लापता
इस आपदा की सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। विभिन्न सरकारी और मीडिया अपडेट में लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है, क्योंकि दूरदराज के इलाकों से संपर्क टूटने के कारण सभी लोगों की स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है। शुरुआती रिपोर्टों में 750 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों और पर्यटकों की भी बताई जा रही है। भारतीय नागरिकों के भी बड़ी संख्या में लापता होने की खबर है। भारत सरकार से जुड़े शुरुआती अपडेट में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।
सुरक्षा बलों का बड़ा बचाव अभियान
बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्थानों पर मलबा, तेज नदी प्रवाह और क्षतिग्रस्त सड़कें बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा और बचाव दल भी तैनात किए हैं। घायलों को हेलीकॉप्टरों के जरिए अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है। अलग-अलग अस्पतालों में बाढ़ से घायल लोगों का उपचार जारी है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत ने भी राहत और मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल की है। भारत की ओर से आवश्यक राहत सामग्री, चिकित्सा सामग्री और आपदा राहत सामान नेपाल भेजा गया है। भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
भारत और नेपाल के बीच संपर्क और सहयोग को देखते हुए भारतीय नागरिकों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। नेपाल में मौजूद भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संबंध में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रभावित इलाकों में बढ़ी चिंता
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक जलस्तर बढ़ने की आशंका के कारण राहत एवं बचाव दल भी बेहद सावधानी के साथ काम कर रहे हैं।
इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फीले मलबे, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव भविष्य में इस तरह की घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका
नेपाल के कई प्रभावित इलाकों में अभी भी बचाव दल मलबे और नदी किनारे खोज अभियान चला रहे हैं। कई क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि आने वाले समय में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है।
फिलहाल नेपाल में 162 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और चीन के तिब्बत क्षेत्र में तीन लोगों की मौत की जानकारी के बाद कुल मृतक संख्या कम से कम 165 है। सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।
