ऑनलाइन ‘आधुनिक गुलामी’ का खौफनाक चेहरा: बर्गर पिज़्ज़ा की तरह डिलेवर हो रही है कमसिन लड़कियां

लंदन | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
इंटरनेट ने दुनिया को सुविधाओं और संपर्क का नया माध्यम दिया है, लेकिन इसी डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल मानव तस्करी और यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों के लिए भी किया जा रहा है। ब्रिटेन की Independent Anti-Slavery Commissioner (IASC) की फरवरी 2026 में जारी रिपोर्ट ‘Behind the Profile’ ने Adult Services Websites (ASWs) पर महिलाओं के संभावित शोषण और तस्करी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
रिपोर्ट के मुताबिक 12 Adult Services Websites पर एक समय में करीब 63,000 विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया। इन वेबसाइट्स पर जनवरी 2026 के दौरान करीब 4.17 करोड़ विजिट दर्ज हुईं। जांच में 59 प्रतिशत विज्ञापनों में मानव तस्करी या शोषण से जुड़े कम से कम तीन संकेत पाए गए, जबकि 39 प्रतिशत विज्ञापनों में चार या उससे अधिक संकेत मौजूद थे। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
रिपोर्ट में बताया गया कि शोषण के संकेतों में एक ही फोन नंबर का कई विज्ञापनों में इस्तेमाल, नशीली दवाओं के संदर्भ, किसी महिला के ‘नए इलाके में आने’ का उल्लेख, बेहद कम कीमत और यौन सेवाओं की व्यापक सूची जैसे पैटर्न शामिल थे। हालांकि, किसी विज्ञापन में ऐसे संकेत मिलना अपने आप में मानव तस्करी साबित नहीं करता, बल्कि संभावित शोषण की चेतावनी माना गया है। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
रिपोर्ट में शामिल पीड़ित महिलाओं के बयानों से सामने आया कि कुछ मामलों में तस्कर या हिंसक साथी महिलाओं की जानकारी के बिना उनके ऑनलाइन प्रोफाइल बनाते थे, ग्राहकों से बातचीत और बुकिंग का इंतजाम करते थे तथा कमाई पर नियंत्रण रखते थे। कई महिलाओं को धमकी, डर और नियंत्रण का सामना करना पड़ा। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
एक पीड़िता ने अपने अनुभव को आधुनिक ‘गुलाम बाजार’ जैसा बताया। रिपोर्ट में ऐसे मामलों का भी उल्लेख है जहां महिलाओं को आर्थिक लाभ और स्वतंत्रता का लालच देकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया और बाद में वे शोषण तथा नियंत्रण के जाल में फंस गईं। (Ruhama)
Independent Anti-Slavery Commissioner Eleanor Lyons ने कहा है कि ऑनलाइन शोषण अब केवल इंटरनेट के पीछे छिपी समस्या नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार Adult Services Websites की संरचना, कमजोर सत्यापन व्यवस्था, खरीदारों की गुमनामी और अपर्याप्त रिपोर्टिंग तंत्र संभावित शोषण का खतरा बढ़ा सकते हैं। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
रिपोर्ट ने सरकार और नियामक संस्थाओं से कानून तथा डिजिटल नियमन को तकनीक के साथ बदलने, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने और पीड़ितों के लिए बेहतर सहायता व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। साथ ही रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी ऑनलाइन यौन सेवा विज्ञापन मानव तस्करी के मामले नहीं होते; चिंता उन मामलों को लेकर है जहां शोषण, जबरदस्ती या तस्करी के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। (Independent Anti-Slavery Commissioner)
