औरंगाबाद: कुणबी जाति प्रमाणपत्र के लिए पुरानी अभिलेखीय प्रविष्टियां खोजने वेबसाइट की लें मदद: विभागीय आयुक्त
जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर गांववार उपलब्ध हैं पुराने अभिलेख

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
कुणबी जाति प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक पुराने अभिलेखों की प्रविष्टियां अब संबंधित जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर गांववार उपलब्ध करा दी गई हैं। नागरिक इन प्रविष्टियों को आसानी से खोजकर डाउनलोड कर सकते हैं। उपलब्ध अभिलेख के आधार पर वंशावली जोड़कर जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है। यह जानकारी छत्रपति संभाजीनगर संभाग के विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने दी।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति के माध्यम से प्राप्त कुणबी संबंधी अभिलेख संबंधित जिलों की वेबसाइटों पर उपलब्ध कराए गए हैं। इससे कुणबी जाति प्रमाणपत्र के लिए पूर्वजों से संबंधित पुराने रिकॉर्ड खोजने की प्रक्रिया आसान हो गई है।
औरंगाबाद जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘कुणबी मराठा दस्तावेज अभिलेख’ का विकल्प उपलब्ध है। वेबसाइट पर इस विकल्प को चुनने के बाद तहसीलवार अभिलेख देखे जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, सोयगांव तहसील के उपलब्ध रिकॉर्ड में गांव का नाम, अभिलेख का प्रकार, अभिलेख का उपप्रकार और संबंधित व्यक्ति का नाम जैसी जानकारी दी गई है। सोयगांव तहसील में कुल 31 अभिलेख उपलब्ध हैं, जिनमें ‘रामचंद्र संपत पाटील’ के नाम से दर्ज ‘कुणबी’ प्रविष्टि भी शामिल है।
यदि संबंधित व्यक्ति की प्रविष्टि उपलब्ध है, तो नागरिक वेबसाइट से उस अभिलेख की प्रति डाउनलोड कर सकते हैं। यदि संबंधित व्यक्ति के साथ अपना पारिवारिक संबंध साबित होता है, तो उस दस्तावेज की प्रति जाति प्रमाणपत्र के आवेदन के साथ संलग्न की जा सकती है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति से लेकर आवेदक तक की वंशावली उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर साबित करना आवश्यक होगा।
कुणबी जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करते समय उपलब्ध अभिलेख और आवेदक के संबंधित व्यक्ति के साथ संबंध का उचित मेल होना जरूरी है। केवल किसी व्यक्ति के नाम से रिकॉर्ड उपलब्ध होने मात्र से जाति प्रमाणपत्र स्वतः जारी नहीं होता। नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों और वंशावली से जुड़े प्रमाणों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
राज्य के सभी जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर इस प्रकार के पुराने अभिलेख उपलब्ध कराए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने संबंधित जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने गांव और पूर्वजों से संबंधित प्रविष्टियां खोजें। नागरिकों तक ये अभिलेख आसानी से पहुंचाने के लिए जिलाधिकारियों तथा उनके अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रयास किए हैं। नागरिक उपलब्ध अभिलेखों का लाभ उठाते हुए आवश्यक दस्तावेज और वंशावली के प्रमाण संलग्न कर जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करें।
