रात साढ़े 11 बजे जालना अग्निशमन दल में सन्नाटा! दो कर्मचारी सोते मिले, आपातकालीन फोन कक्ष भी खाली

जालना/कादरी हुसैन
नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए 24 घंटे तत्पर रहने वाले जालना महानगरपालिका के अग्निशमन दल की रात की ड्यूटी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारियों के समय पर ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने की शिकायतों के बीच रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे मीडिया टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में अग्निशमन दल के कार्यालय में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय में केवल दो कर्मचारी मौजूद दिखाई दिए और दोनों सोते हुए नजर आए। वहीं, आपातकालीन टेलीफोन कक्ष की कुर्सी भी खाली दिखाई दी। ऐसे में यदि उस समय किसी नागरिक ने आग, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन घटना की सूचना देने के लिए फोन किया होता, तो कॉल कौन उठाता? यह सवाल अब गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
आपातकालीन सेवा में हर सेकंड महत्वपूर्ण
अग्निशमन दल ऐसी आपातकालीन सेवा है, जहां कुछ मिनटों की देरी भी किसी व्यक्ति की जान और संपत्ति के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है। आग लगने की स्थिति में सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई आवश्यक होती है।
ऐसे में रात के समय आपातकालीन टेलीफोन कक्ष का खाली पाया जाना और मौजूद कर्मचारियों का सोते हुए नजर आना पूरी रात की ड्यूटी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
कितने कर्मचारी तैनात होने चाहिए थे?
अब यह भी सवाल उठ रहा है कि जालना मनपा के अग्निशमन दल में कुल कितने कर्मचारी कार्यरत हैं और रात की ड्यूटी के लिए नियमानुसार कितने कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। रविवार रात कितने कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित थी और वास्तव में कितने कर्मचारी मौजूद थे, इसकी जानकारी सामने आना जरूरी है।
इसके साथ ही आपातकालीन फोन पर आने वाली कॉल स्वीकार करने के लिए क्या अलग कर्मचारी नियुक्त किया गया है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
आग लगने पर तत्काल मदद कौन पहुंचाएगा?
जालना शहर में बढ़ती आबादी, बाजारों, रिहायशी क्षेत्रों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों को देखते हुए अग्निशमन दल की सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है। नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में तत्काल फोन संपर्क और समय पर अग्निशमन सहायता उपलब्ध होना आवश्यक है।
रात करीब साढ़े 11 बजे सामने आई स्थिति ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि उस समय आपातकालीन कॉल आने पर नागरिकों को तत्काल सहायता कैसे मिलती?
प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग
मीडिया टीम के निरीक्षण में सामने आई इस स्थिति के बाद अब जालना महानगरपालिका प्रशासन और अग्निशमन दल के वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्ट स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।
रात की ड्यूटी पर कितने कर्मचारी तैनात होना निर्धारित था? वास्तव में कितने कर्मचारी मौजूद थे? कर्मचारी ड्यूटी के दौरान सोते हुए क्यों पाए गए? आपातकालीन टेलीफोन कक्ष खाली क्यों था? और ऐसी स्थिति में आपातकालीन कॉल आने पर उसकी जिम्मेदारी किस कर्मचारी की थी?
नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इन सवालों पर मनपा प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई और स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
