दुष्काळी स्थिति पर विशेष अधिवेशन बुलाए सरकार, किसानों को तत्काल मदद दें : अंबादास दानवे

मुंबई | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा कर किसानों को तत्काल सहायता देने के लिए सरकार को विधानमंडल का विशेष अधिवेशन बुलाना चाहिए। यह मांग शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अंबादास दानवे ने की है। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजा है। दानवे ने दावा किया कि राज्य की स्थिति 1972 के सूखे से भी अधिक गंभीर है।
दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के दौरे की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कड़ी पुलिस सुरक्षा और बैरिकेडिंग की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आम किसानों से संवाद करने के लिए मुख्यमंत्री को इतनी सुरक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ती है।
सरकार द्वारा सूखे को लेकर जारी किए गए ‘ट्रिगर-1’ शासनादेश की कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति होने के बावजूद सरकार ने पुरानी ही व्यवस्थाओं को दोहराया है। उनके अनुसार, यह निर्णय सूखाग्रस्त लोगों की चोट पर नमक छिड़कने जैसा है।
वडेट्टीवार ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के अंदर जाकर किसानों की वास्तविक स्थिति का जायजा नहीं लिया। उन्होंने मांग की कि पंचनामा तैयार करने के लिए 5 अक्टूबर तक इंतजार करने के बजाय प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की तत्काल सहायता दी जाए।
वडेट्टीवार ने ‘ट्रिगर-1’ आदेश पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि शासनादेश के साथ तालुकावार वर्षा की कमी के आधिकारिक आंकड़े और कृषि आयुक्त की पूरी रिपोर्ट पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य के 75 प्रतिशत हिस्से में सूखा घोषित किया है, लेकिन ठोस आर्थिक सहायता के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आज के निर्णय में केवल मामूली रियायतों की घोषणा की गई है।
सपकाल ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया है और उन्होंने स्वयं सूखे की गंभीरता देखी है। ऐसे में पंचनामा और सर्वेक्षण की आवश्यकता ही क्या है? उन्होंने मांग की कि दशहरा और दीपावली के त्योहार सामने हैं, इसलिए किसानों के बैंक खातों में प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये तत्काल जमा किए जाएं और बाद में आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की जाए।