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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर खान एजाज अहमद ने जताई चिंता

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज, खान एजाज अहमद की प्रदर्शनकारियों से सतर्क रहने की अपील

नई दिल्ली | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठे सवालों के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों और संगठनों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किए हैं। 25 सितंबर को कई राज्यों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस द्वारा पानी की बौछार किए जाने की जानकारी सामने आई। (India Today)

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सामाजिक कार्यकर्ता खान एजाज अहमद ने आंदोलन और अनशन में शामिल नागरिकों से विशेष रूप से सतर्क, संयमित और शांतिपूर्ण रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन या अनशन कर रहे हैं, तो उनके साथ होने वाली किसी भी कार्रवाई पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

खान एजाज अहमद ने कहा कि मौजूदा आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था के खिलाफ विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए जा रहे हैं। इसलिए प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगों के साथ-साथ अपनी सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को लेकर भी पूरी तरह जागरूक रहना चाहिए।

पिछले प्रदर्शन की घटनाओं से सबक लेने की अपील

खान एजाज अहमद ने पहले हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए थे, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से बल प्रयोग और लाठीचार्ज के दृश्य दिखाई दिए थे। उन्होंने कहा कि उन वीडियो में कुछ ऐसे पुलिसकर्मी भी दिखाई देने का दावा किया गया था, जिनकी पहचान के लिए नाम-पट्टी या स्पष्ट पहचान दिखाई नहीं दे रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे दावे और वीडियो सामने आए थे जिनमें सादे कपड़ों में मौजूद लोगों को पुलिस कार्रवाई में शामिल बताया गया। हालांकि, ऐसे वीडियो की वास्तविकता और उनमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में आवश्यक है। जुलाई के CJP प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस कार्रवाई के वीडियो और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग वाली याचिका भी दायर हुई थी, जबकि अदालत ने उस याचिका को स्वीकार नहीं किया। (The Indian Express)

महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के वीडियो पर भी सवाल

खान एजाज अहमद ने कहा कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी प्रसारित हुए थे, जिनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित रूप से पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के दावे किए गए। जुलाई में CJP के एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ सादे कपड़ों में एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया था, जिस पर विवाद हुआ और कार्रवाई की मांग भी उठी थी। (The Indian Express)

उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे मामले में केवल वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है तो उसकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और यदि वीडियो या आरोप भ्रामक पाए जाते हैं तो उनकी भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

नीट विरोध प्रदर्शन की गलतियां दोहराने से बचने की अपील

खान एजाज अहमद ने कहा कि पूर्व में नीट और अन्य मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में जो गलतियां, कमियां या व्यवस्थागत चूक सामने आई थीं, उनसे इस बार सबक लेना जरूरी है। उनके मुताबिक मौजूदा आंदोलन का स्वरूप व्यापक है और इसमें बड़ी संख्या में युवा तथा नागरिक शामिल हो सकते हैं। ऐसे में छोटी-सी चूक भी पूरे आंदोलन की दिशा बदल सकती है।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के उकसावे में न आएं, कानून अपने हाथ में न लें और पुलिस या प्रशासन के साथ अनावश्यक टकराव से बचें। उनका कहना है कि आंदोलन की ताकत उसकी शांतिपूर्ण और अनुशासित प्रकृति में होनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर जोर

खान एजाज अहमद ने कहा कि प्रदर्शन आयोजकों को पहले से चिकित्सा सहायता, प्राथमिक उपचार, कानूनी सहायता और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं, बुजुर्गों और किसी भी प्रकार की विशेष आवश्यकता वाले प्रदर्शनकारियों के लिए अलग से सुरक्षा और सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन स्थल पर पुलिस कार्रवाई की स्थिति बनती है तो प्रदर्शनकारियों को भीड़ में भगदड़ पैदा करने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाने, घायल लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता दिलाने और घटनाओं का तथ्यात्मक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने लाठीचार्ज, पानी की बौछार या आंसू गैस जैसी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों को पहले से सुरक्षा और चिकित्सकीय सहायता की वैधानिक व्यवस्था के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। उन्होंने किसी भी प्रकार के प्रतिरोध या हिंसक प्रतिक्रिया के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति संभालने पर जोर दिया।

वायरल वीडियो को लेकर भी सावधानी जरूरी

खान एजाज अहमद ने प्रदर्शनकारियों से सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले वीडियो और दावों को लेकर भी सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी पुराने वीडियो को नए प्रदर्शन से जोड़कर या किसी दूसरे स्थान की घटना को वर्तमान आंदोलन से जोड़कर प्रसारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाल ही में 25 सितंबर के प्रदर्शन के संदर्भ में एक पुराना जुलाई का वीडियो सोशल मीडिया पर नए प्रदर्शन का बताकर प्रसारित किए जाने का मामला भी सामने आया था। इसलिए उन्होंने कहा कि किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले उसकी तारीख, स्थान और वास्तविक संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी है। (Fact Crescendo)

देशभर में प्रदर्शन और हिरासत का दौर

25 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। असम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। दिल्ली में भी जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। (India Today)

इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव, बैरिकेडिंग तथा भीड़ को हटाने के लिए पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था तथा निर्धारित प्रदर्शन नियमों के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। (Hindustan Times)

खान एजाज अहमद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांगों और असहमति को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का अधिकार है। साथ ही प्रदर्शनकारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे कानून का पालन करें और किसी भी ऐसी गतिविधि से बचें जिससे आंदोलन हिंसक या अराजक स्थिति में बदल जाए।

उन्होंने कहा कि युवाओं और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मतदाता सूची में नाम जुड़ने, हटने या संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए।

खान एजाज अहमद ने अंत में प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें, अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें, अफवाहों से बचें, तथ्यात्मक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी कथित ज्यादती की शिकायत को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सामने लाएं। उनके अनुसार, आंदोलन की आवाज तभी प्रभावी रहेगी जब वह शांतिपूर्ण, अनुशासित और तथ्य आधारित रहेगी।

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