औरंगाबाद में एक महीने के नवजात की तीन बार खरीद-फरोख्त! 1.20 लाख में मां ने बेचा, तेलंगाना पहुंचते ही खुला पूरा रैकेट

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
औरंगाबाद में एक महीने के नवजात शिशु की कथित खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जन्म देने वाली मां ने अपने ही बच्चे को कथित तौर पर 1 लाख 20 हजार रुपये में बेच दिया। इसके बाद उसने 25 हजार रुपये का मोबाइल और 62 हजार रुपये के गहने खरीद लिए। मामला यहीं नहीं रुका। बच्चे को अधिक पैसे कमाने के लिए दलालों ने आगे कई बार बेचा और आखिरकार बच्चा तेलंगाना पहुंच गया।
मुकुंदवाडी पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ते हुए तेलंगाना पहुंचकर बच्चे को बरामद किया और कथित मानव तस्करी के इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मामले में अब तक बच्चे के कथित माता-पिता, शहर की दो महिला दलालों और इसके बाद एक अन्य महिला दलाल, तेलंगाना के एक व्यक्ति तथा उसकी रिश्तेदार महिला समेत कुल सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है।
कैसे शुरू हुआ बच्चे की खरीद-फरोख्त का खेल?
लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे बच्चे के कथित माता-पिता के संपर्क में सीमा रेशवाल और उसकी मां कौशल्या पवार आईं। आरोप है कि कौशल्या ने बच्चे की मां से संपर्क कर उसे 1 लाख 20 हजार रुपये दिए और एक महीने के नवजात को अपने कब्जे में ले लिया।
बाद में बच्चे के कथित माता-पिता को संदेह हुआ कि दलालों ने बच्चे के बदले उनसे अधिक रकम वसूली है। उन्होंने पुलिस में शिकायत दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकुंदवाडी पुलिस ने स्वयं शिकायतकर्ता बनकर मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
जांच में सामने आया कि सीमा और कौशल्या ने बच्चे को संगीता आव्हाड नामक महिला दलाल को 2 लाख 70 हजार रुपये में बेच दिया। इसके बाद संगीता ने बच्चे का सौदा तेलंगाना के सुरेश राजाराम गुंटुका से किया। नांदेड में कथित तौर पर 3 लाख 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ।
इसके बाद बच्चे को तेलंगाना के तालागड़ में रहने वाली सुरेश की रिश्तेदार उमा खटकम को सौंप दिया गया।
बारहवीं पास नहीं, फिर भी ‘डॉक्टर’ के तौर पर करता था इलाज
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सुरेश गुंटुका ने बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी नहीं की है, इसके बावजूद वह तेलंगाना में प्राथमिक स्तर पर चिकित्सा उपचार करता था।
बताया गया है कि तेलंगाना में आईवीएफ उपचार का खर्च करीब 8 से 10 लाख रुपये तक आता है, जबकि महाराष्ट्र में यही उपचार अपेक्षाकृत कम खर्च में होने के कारण गुंटुका तेलंगाना से आईवीएफ के लिए जरूरतमंद लोगों को महाराष्ट्र लाता था। इसी दौरान उसकी पहचान संगीता आव्हाड से हुई।
उधर, गुंटुका की 45 वर्षीय रिश्तेदार उमा खटकम संतान नहीं होने के कारण बच्चा गोद लेने की इच्छा रखती थी। आरोप है कि संगीता ने उसे गुंटुका के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को गोद दिलाने का भरोसा दिया और उससे साढ़े तीन लाख रुपये ले लिए।
पूछताछ बढ़ी तो खुद थाने पहुंचाकर सौंप दिया बच्चा
मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस का शिकंजा आरोपियों पर कसता गया। पुलिस की पूछताछ बढ़ने की जानकारी मिलते ही सुरेश गुंटुका और उमा खटकम ने कथित तौर पर बच्चे को खुद मुकुंदवाडी पुलिस थाने लाकर सौंप दिया।
पुलिस ने नवजात को अपने संरक्षण में लेकर देखभाल के लिए एक संस्था में भर्ती कराया है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस अब इस कथित खरीद-फरोख्त के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।