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पीता था इंसानी भेजे का सूप, घर से मिलीं 14 खोपड़ियां – 25 साल बाद सजा पाएगा सीरियल किलर राजा कलंदर

डबल मर्डर केस में 25 साल बाद इंसाफ, नरभक्षी सीरियल किलर राजा कोलंदर दोषी करार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 25 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने एक कुख्यात अपराधी को दोषी करार दिया है। राजा कोलंदर उर्फ राम निरंजन, जो नरभक्षी, सीरियल किलर और मानव खोपड़ियों का संग्रहकर्ता रहा है, को लखनऊ की अदालत ने सोमवार को हत्या का दोषी ठहराया। सजा का ऐलान जज रोहित सिंह शुक्रवार को करेंगे।

मनोज सिंह और ड्राइवर की हत्या
वर्ष 2000 में मनोज कुमार सिंह और उनके ड्राइवर रवि श्रीवास्तव की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में राजा कोलंदर और उसके साले बच्छराज कोल को दोषी ठहराया गया है। आरोपियों ने लखनऊ से रीवा जा रहे मनोज और उनके ड्राइवर को चारबाग स्टेशन के पास से गाड़ी में बैठाया था। आखिरी बार उन्हें रायबरेली के हरचंदपुर में देखा गया था। कुछ दिन बाद उनके क्षत-विक्षत शव प्रयागराज के शंकरगढ़ जंगल से मिले।

पहले भी हो चुकी है उम्रकैद की सजा
राजा कोलंदर पहले भी पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। उस केस की जांच के दौरान उसके फार्महाउस से 14 मानव खोपड़ियां बरामद की गई थीं। कोर्ट ने तब भी उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

नरभक्षी प्रवृत्ति और सनसनीखेज खुलासे
जांच में खुलासा हुआ कि राजा कोलंदर नरभक्षी था। वह सिर काटकर इंसानों के भेजे (ब्रेन) का सूप बनाकर पीता था। उसकी यह क्रूरता उसे ‘ह्यूमन ब्रेन सूप किलर’ की उपाधि दिला चुकी है। मामले की शुरुआत में पुलिस ने मार्च 2001 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन सुनवाई 2013 में शुरू हो सकी।

परिवार की लड़ाई से मिला इंसाफ
मनोज सिंह के पिता शिव हर्ष सिंह ने इस केस को लंबे समय तक लड़ा। गवाह के रूप में उनके भाई शिव शंकर सिंह की गवाही ने केस की दिशा तय की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अपहरण, लूट और हत्या पूर्व-नियोजित थी। मनोज की भूरी कोट भी आरोपी के घर से बरामद हुई थी।

राजा कोलंदर प्रयागराज के शंकरगढ़ का रहने वाला है और नैनी स्थित केंद्रीय आयुध भंडार (सीओडी) छिवकी में काम करता था। 25 साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब न्याय की उम्मीद पूरी होती दिख रही है।

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