गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी के खिलाफ औरंगाबाद में कुरैशी समाज का मूक मोर्चा, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

औरंगाबाद: गौरक्षा के नाम पर गुंडों द्वारा की जा रही हिंसा, जबरन वसूली और जातिगत अत्याचार के विरोध में आज कुरैशी समाज ने औरंगाबाद शहर में ऐतिहासिक मूक मोर्चा निकाला। यह मोर्चा दोपहर 2 बजे आमखास मैदान से शुरू होकर विभागीय आयुक्त कार्यालय तक पहुंचा, जहां समाज की ओर से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
क्या है मामला?
कुरैशी समाज के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ तथाकथित ‘गौरक्षक’ बिना किसी कानूनी अधिकार के गैर-प्रतिबंधित जानवरों की वैध खरीद-बिक्री और परिवहन कर रहे लोगों पर हमले कर रहे हैं। ये लोग न केवल मारपीट, धमकी और गाली-गलौच करते हैं, बल्कि कई मामलों में प्राणघातक हमले और जबरन वसूली तक की घटनाएं हुई हैं।
समाज के व्यापार पर असर, किसानों की भी बढ़ी मुसीबत
इस अन्याय के विरोध में महाराष्ट्र के मांस व्यापारी पिछले डेढ़ महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है और किसान वर्ग को भी आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि वे अपने जानवर नहीं बेच पा रहे हैं।
प्रमुख मांगें जो ज्ञापन में रखी गईं:
- गौरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- व्यापारी और किसान वर्ग को ऐसे अराजक तत्वों से सुरक्षा दी जाए।
- झूठे केस जैसे फौजदारी, तडीपार, एमपीडीए, मोका आदि वापस लिए जाएं।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर जिले और तालुका में स्लॉटर हाउस की स्थापना की जाए।
- जब्त किए गए जानवरों को गौरक्षा के नाम पर तस्करी और गलत लाभ से बचाया जाए।
कौन थे प्रमुख उपस्थित लोग?
इस मूक मोर्चे का नेतृत्व जमीयतुल कुरैश महाराष्ट्र के जिलाध्यक्ष हाजी ईसा कुरैशी, कलीम कुरैशी, हाजी सलीम कुरैशी, कदीर मौलाना, कमाल फारुकी, अरविंद कांबले, जयश्री शिर्के, अफसर खान, नासेर सिद्दीकी, इलियास किरमानी, एड. सैय्यद अकरम, एम.डी. तैय्यब, एड. अनीस शेख, हाफिज मुख्तार कुरैशी, मोहसिन खान समेत सैकड़ों व्यापारियों, किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की।
यह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ मोर्चा कुरैशी समाज के संघर्ष और न्याय की मांग का प्रतीक बन गया। समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
