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टिकट पर ऑपरेशन सिंदूर और मोदी की फोटो, कांग्रेस ने लगाया सेना के पराक्रम के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप!

भोपाल: रेलवे आरक्षण टिकटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा संदेश छपने को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भाजपा पर सेना के पराक्रम को राजनीति चमकाने के साधन के रूप में उपयोग करने का आरोप लगाया है। वहीं बीजेपी ने भी कांग्रेस को जवाब देते हुए कहा कि पार्टी खुद ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन कर चुकी है, अब विरोध करना दोहरापन है।

कांग्रेस का आरोप – सेना के पराक्रम का राजनीतिक उपयोग

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स (X) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सेना के पराक्रम को भी अपनी राजनीति चमकाने के लिए एक प्रोडक्ट की तरह बेचा जा रहा है। केंद्र सरकार कितनी विज्ञापनजीवी हो चुकी है, इसका ताज़ा उदाहरण रेलवे टिकट पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का इस्तेमाल प्रधानमंत्री के प्रचार के तौर पर किया जाना है।”

उमंग सिंघार ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कई पुराने उदाहरण भी गिनाए:

  • ऑपरेशन सिंदूर में शामिल जवानों की तस्वीरों की जगह अपनी तस्वीर लगाना।
  • कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट पर वैज्ञानिकों की मेहनत के बजाय अपना चेहरा छपवाना।
  • पुलवामा हमले के शहीदों के नाम पर वोट मांगना।
  • बालाकोट एयर स्ट्राइक को चुनावी मुद्दा बनाना।
  • सरकारी पेट्रोल पंपों पर अपनी तस्वीरें लगवाना।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आपदा को अवसर में बदलने की कला अगर किसी को सीखनी है, तो भाजपा से सीखे!”

भाजपा का पलटवार – कांग्रेस खुद कर चुकी है समर्थन

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने कहा कि कांग्रेस को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रचार-प्रसार से आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उनकी पार्टी खुद इस सैन्य अभियान का समर्थन कर चुकी है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी ने सेना की कार्रवाई की सराहना की है और कांग्रेस कार्य समिति ने भी एकमत से ऑपरेशन को समर्थन दिया है।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अभियान के नाम को लेकर जरूर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन सेना की कार्रवाई को लेकर कोई विरोध नहीं है।

इस पूरे विवाद ने चुनावी माहौल में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अभियानों का इस तरह प्रचार राजनीति से प्रेरित है या जनजागरूकता का हिस्सा?

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