Breaking NewsMaharashtraPolitics

मालेगांव ब्लास्ट पर महायुति सरकार में मतभेद, राकांपा ने कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की मांग की

मालेगांव बम धमाके के सभी आरोपियों की बरी होने के फैसले के बाद महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भारतीय जनता पार्टी ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने फैसले पर नाराजगी जताई है।

राकांपा के राष्ट्रीय महासचिव और अल्पसंख्यक विंग के अध्यक्ष सैयद जलालुद्दीन ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस निर्णय को जल्द से जल्द हाईकोर्ट में चुनौती दे। जलालुद्दीन ने रविवार को बयान जारी कर कहा, “यदि जरूरत पड़ी तो हम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुलाकात भी करेंगे। हम चाहते हैं कि संविधान की सर्वोच्चता बनी रहे और सभी को समान न्याय मिले।”

मुंबई ब्लास्ट के फैसले का हवाला

जलालुद्दीन ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व में सरकार ने मुंबई लोकल ट्रेन धमाके में बरी हुए मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, तो मालेगांव धमाके में बरी हुई साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और अन्य के खिलाफ भी वैसी ही कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह संदेश जाएगा कि वह एक धर्म विशेष के साथ खड़ी है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भेदभाव की भावना गहराएगी।

संविधान सर्वोपरि, धर्म नहीं

जलालुद्दीन ने स्पष्ट किया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सरकार का कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने कहा, “सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी नागरिकों के धर्मों का समान रूप से सम्मान करे। उसे ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहिए जिससे यह लगे कि वह एक धर्म विशेष का पक्ष ले रही है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।”

उन्होंने यह भी कहा कि मालेगांव ब्लास्ट फैसले से पीड़ित परिवार, मृतकों के परिजन और धर्मनिरपेक्ष नागरिक बेहद आहत हैं। इस फैसले को चुनौती देना न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

कांग्रेस से भी प्रतिक्रिया की उम्मीद

जलालुद्दीन ने कांग्रेस पार्टी, खासकर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ से भी इस मामले में स्पष्ट रुख रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “मुंबई लोकल ब्लास्ट केस में कांग्रेस ने जिस तरह से रुख अपनाया था, वैसी ही प्रतिक्रिया अब भी अपेक्षित है।”

अंत में जलालुद्दीन ने दोहराया कि भले ही राकांपा सरकार का हिस्सा है, लेकिन वह एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और संविधान की सर्वोच्चता में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि न्याय और निष्पक्षता को बनाए रखना हर सत्ताधारी दल की जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button