अनुमति नहीं मिली, फिर भी मुंबई कूच पर अड़े मनोज जरांगे; बोले- “मुझे कौन रोकता है, यह देखता हूं!” अंतरवालीवासी हुए भावुक

जालना/कादरी हुसैन
अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे ने सरकार की ओर से मुंबई जाने की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद अपने फैसले पर कायम रहने का ऐलान किया है। जरांगे ने पत्रकार परिषद में कहा कि वे कल सुबह 11 बजे निर्धारित मार्ग से मुंबई की ओर रवाना होंगे।
जरांगे ने कहा कि सरकार ने मुंबई जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। उपचार और पानी-सलाइन बंद होने के कारण उनकी तबीयत फिर बिगड़ रही है। पेट और पैरों में जलन के साथ अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि मराठा समाज अपना शब्द बदलता है, ऐसा संदेश समाज में नहीं जाना चाहिए और समाज की प्रतिष्ठा उनके लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई की ओर रवाना होते समय उनके साथ बड़ा जनसमूह नहीं होगा। उनके अनुसार, दो गाड़ियां, दो एंबुलेंस और करीब 8 से 10 सहयोगी उनके साथ रहेंगे। उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा, “पहले मैं अकेले ही मुंबई की ओर जाता हूं। मुझे कौन रोकता है और कौन अनुमति से इनकार करता है, यह देखता हूं।”
सरकार की रणनीति का रणनीति से देंगे जवाब
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए जरांगे ने आरोप लगाया कि त्योहारों के समय का सहारा लेकर मराठा समाज को मुश्किल में डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार यह माहौल बनाने की कोशिश कर सकती है कि मराठा समाज के मुंबई पहुंचने पर दंगा होगा और उसका जिम्मेदार मराठा समाज को ठहराया जाएगा।
जरांगे ने कहा कि सरकार की रणनीति का जवाब रणनीति से देना होगा। उन्होंने कहा कि पहले रास्ते के कांटे हटाए जाते हैं और फिर रथ आगे बढ़ाया जाता है। समय के अनुसार रणनीति और निर्णय बदलने पड़ते हैं।
पाटोदा, श्रीगोंदा, हडपसर और खोपोली में होगा मुकाम
जरांगे ने बताया कि मुंबई जाने के लिए पहले से निर्धारित मार्ग में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पाटोदा, श्रीगोंदा, हडपसर और खोपोली में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुकाम किया जाएगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को इन स्थानों पर अंतरवाली सराटी की तर्ज पर मंच तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अनशन जारी रखने की बात कहते हुए जरांगे ने कहा कि मुकाम वाले स्थानों पर बनाए गए मंच पर ही वे ठहरेंगे।
“सलाइन पर जिंदा रहता हूं, बंद होते ही फिर थक जाता हूं”
अपनी तबीयत को लेकर जरांगे ने कहा कि सलाइन शुरू रहने पर कुछ ऊर्जा मिलती है, लेकिन सलाइन बंद होते ही फिर अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है। उन्होंने बताया कि मुंबई तक का सफर पांच से छह दिनों का हो सकता है और इस दौरान स्वास्थ्य और बिगड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि मुकाम के स्थानों पर वे पहले निर्धारित समय से कुछ समय पहले पहुंच सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा, “जान देने की नौबत आ जाए तो भी चलेगा, लेकिन समाज की प्रतिष्ठा कम नहीं होने दूंगा।”
अंतरवाली सराटी में भावुक हुआ माहौल
इस बीच, सोमवार को अंतरवाली सराटी में जरांगे के संबोधन के दौरान भावुक माहौल देखने को मिला। उन्होंने उपस्थित समाजबंधुओं से कहा कि “संभावना है कि कल हमारी आखिरी मुलाकात हो।” यह सुनते ही कई मराठा समाजबंधु और महिलाएं भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
जरांगे ने कहा कि वे कल 8 से 10 साथियों के साथ मुंबई के लिए रवाना होंगे। उन्होंने मराठा समाजबंधुओं से अपील की कि वे कल बड़ी संख्या में मुंबई की ओर न आएं। मुंबई में समाजबंधुओं और महिलाओं को किस समय और कब पहुंचना है, इसकी जानकारी दो दिन पहले दी जाएगी, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में जरांगे ने महाराष्ट्र के नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए मराठा समाज से फिलहाल शांति, संयम और सतर्कता बनाए रखने की अपील की। उनके मुंबई कूच के ऐलान के बाद अब मराठा आंदोलन की अगली दिशा पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं।