वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सुनवाई के दौरान उठाए 5 बड़े सवाल

वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर दायर 73 याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं से कई गंभीर सवाल पूछे। सुनवाई के दौरान वक्फ संपत्ति, बोर्ड की संरचना और धार्मिक ट्रस्टों की समानता जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 5 प्रमुख टिप्पणियां:
1. “दिल्ली हाईकोर्ट वक्फ की जमीन पर?”
CJI संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल किया, “हमें बताया गया है कि दिल्ली हाईकोर्ट वक्फ की जमीन पर बना है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी वक्फ का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन कुछ मामलों में वास्तविक चिंता है।”
2. “पुराने वक्फ की रजिस्ट्री कैसे करेंगे?”
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से CJI ने पूछा, “ऐसे वक्फ जो दशकों या सदियों से हैं, उन्हें आप कैसे रजिस्टर्ड करेंगे? उनके पास क्या दस्तावेज़ होंगे?” उन्होंने कहा, “हां, दुरुपयोग हुआ है, लेकिन असली वक्फ भी हैं। वक्फ बाई यूजर को मान्यता दी गई है। इसे खत्म करने से समस्या पैदा होगी।”
3. “अतीत को दोबारा नहीं लिखा जा सकता”
CJI ने कहा, “जब किसी सार्वजनिक ट्रस्ट को 100 या 200 साल बाद वक्फ घोषित कर दिया जाता है, तो ये चिंता का विषय है।” इस पर जब केंद्र ने कहा कि वक्फ को ट्रस्ट में बदला जा सकता है, CJI ने स्पष्ट किया – “आप इतिहास को फिर से नहीं लिख सकते।”
4. “बोर्ड में केवल मुस्लिम सदस्य क्यों?”
CJI ने सवाल किया, “कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड में 8 सदस्य मुस्लिम और 2 गैर मुस्लिम होंगे। क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी ऐसी व्यवस्था है?” इसपर जब SG मेहता ने तंज भरे अंदाज में कहा कि तब तो यह पीठ भी सुनवाई नहीं कर सकती, CJI ने फौरन जवाब दिया – “जब हम न्याय की कुर्सी पर बैठते हैं, तो धर्म छोड़ देते हैं। आप इस तुलना को जजों से नहीं जोड़ सकते।”
5. “क्या मुस्लिमों को हिंदू ट्रस्ट बोर्ड में शामिल करेंगे?”
बेंच ने केंद्र से तीखा सवाल किया, “क्या अब आप मुस्लिमों को हिंदू धर्मार्थ बंदोबस्ती बोर्ड का हिस्सा बनने की अनुमति देंगे?” सवाल ने धार्मिक ट्रस्टों में समानता और पारदर्शिता पर गहरा विमर्श खड़ा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की ये सुनवाई वक्फ कानून को लेकर गहराते विवाद के बीच बेहद अहम मानी जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सिर्फ धार्मिक मसला नहीं, बल्कि संवैधानिक संतुलन और न्याय की बुनियादी अवधारणाओं से जुड़ा मुद्दा है।
