दिनदहाड़े ससुर की गोली मारकर हत्या करने वाले दामाद को उम्रकैद
अंबड सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, आरोपी पर 16 हजार रुपये जुर्माना भी

जालना | कादरी हुसैन
अंबड स्थित द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने दिनदहाड़े अपने ही ससुर की गोली मारकर हत्या करने वाले दामाद को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम. जे. जे. बेग ने आरोपी किशोर शिवदास पवार (38, निवासी आडूळ, तहसील पैठण, जिला छत्रपति संभाजीनगर) को आजीवन कारावास तथा 16 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
प्रकरण के अनुसार 29 मार्च 2023 की सुबह करीब 8:30 बजे अंबड के शंकर नगर स्थित मृतक पंडित भानुदास काळे के घर पर उनकी बेटी मंदाकिनी गिज्ञानदेव भोसले, पारलेश काळे तथा अन्य परिजन मौजूद थे। इसी दौरान आरोपी किशोर पवार अपने साथियों नितीन लाला जाधव, अजय दिगंबर आंबेकर और अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचा। आरोपियों को जानकारी थी कि मृतक और गवाह अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग से संबंधित हैं।
घर पहुंचते ही आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोपी किशोर ने मृतक से अपनी पत्नी को साथ भेजने को लेकर विवाद किया और देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया। आरोपी किशोर, नितीन और अजय ने मिलकर मृतक के साथ बेरहमी से मारपीट की। इसी दौरान किशोर ने अपने पास मौजूद पिस्टल निकालकर मृतक के गले और पीठ पर दो गोलियां दाग दीं। गंभीर गोली लगने से पंडित काळे की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर फरार हो गए।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि हत्या के बाद आरोपी किशोर पाबोड गांव पहुंचा था, जहां उसने आरोपी सचिन प्रकाश पवार को पूरी घटना बताई और हत्या में इस्तेमाल पिस्टल छिपाने के लिए उसके पास रखवा दी। जांच में यह भी सामने आया कि यह पिस्टल आरोपी धर्मा मुबारक काळे से खरीदी गई थी।
फरियादी मंदाकिनी गिज्ञानदेव भोसले की शिकायत पर अंबड पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 219/2023 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 449, 323, 504, 506, 34, भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25 तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार प्रतिबंधक अधिनियम की धारा 3(2)(व्ही ए) के तहत कार्रवाई की गई।
मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक साजिद अहमद ने की और आरोपी किशोर शिवदास पवार के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। फरार आरोपियों के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 299 के तहत कार्यवाही की गई।
सरकारी पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों की जांच की गई, जिनमें फरियादी मंदाकिनी भोसले, प्रत्यक्षदर्शी पारलेश काळे, गिज्ञानदेव भोसले सहित पंच गवाहों की गवाही महत्वपूर्ण साबित हुई। सरकारी पक्ष की ओर से जिला सहायक सरकारी अभियोक्ता अॅड. वाल्मीक धुगे ने प्रभावी पैरवी की।
न्यायालय ने सभी सबूतों और गवाहों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी किशोर शिवदास पवार को दोषी करार दिया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू और डीवाईएसपी सिद्धेश्वर धुमाळ के मार्गदर्शन में की गई। जांच में पुलिस उपनिरीक्षक आदिनाथ ढाकणे, मुकुंद आघाव, सुनील पाटील सहित अन्य अधिकारियों ने भी सहयोग किया।
