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जालना नगर निगम की सभी बैठकों का सीधा प्रसारण सार्वजनिक किया जाए!

महिला पार्षदों के पति व रिश्तेदारों द्वारा हस्तक्षेप पर सख्त कार्रवाई हो — विकासकुमार बागड़ी

जालना /कादरी हुसैन

जालना शहर महानगरपालिका में विकास से जुड़े निर्णयों और ठोस कार्रवाई पर होने वाली सभी बैठकों का लाइव प्रसारण सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी भी प्रस्ताव को गुप्त रखकर भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे। यह मांग अखिल भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ के महाराष्ट्र प्रदेश संगठनकर्ता विकासकुमार बागड़ी ने की है।

छत्रपती संभाजीनगर के माननीय विभागीय आयुक्त, तथा जालना जिले के जिलाधिकारी एवं जालना महानगरपालिका आयुक्त को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र शासन के परिपत्र दिनांक 20 मई 2022 (नगरपालिका प्रशासन संचालनालय) के अनुसार सभी सभाओं को सार्वजनिक करना अनिवार्य है। इसके अलावा, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत व औद्योगिक नगर अधिनियम, 1965 की धारा 81 उपधारा (12) के तहत नगर परिषद/महानगरपालिका की प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का विवरण क्षेत्र के किसी भी निवासी के लिए उचित समय पर देखने हेतु खुला रखना तथा प्रस्तावों को आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करना वैकल्पिक नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व है।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि:

महानगरपालिका की प्रत्येक मासिक सामान्य सभा का वीडियो रिकॉर्डिंग किया जाए।

रिकॉर्डिंग को महानगरपालिका की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए और इसके लिए बजट में आवश्यक वित्तीय प्रावधान किया जाए।

रिकॉर्डिंग को स्थायी रूप से सुरक्षित रखा जाए।

प्रस्ताव, अनुमोदित कार्यवृत्त और वीडियो रिकॉर्डिंग को सात दिनों के भीतर महानगरपालिका तथा संचालनालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए।

बैठकों का लाइव प्रसारण आधिकारिक वेबसाइट, सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों पर किया जाए।

निर्वाचित महिला पार्षद स्वयं उपस्थित रहें, यह सुनिश्चित किया जाए।

महिला पार्षदों के पति या अन्य अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैठक की कार्यवाही में हस्तक्षेप न हो—इसके लिए कठोर निर्देश जारी किए जाएं।

कार्यवृत्त व प्रस्तावों की विस्तृत प्रविष्टि और व्यापक प्रकाशन सुनिश्चित किया जाए।

विकासकुमार बागड़ी ने चेतावनी दी है कि यदि उपरोक्त शासन परिपत्रों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों व पदाधिकारियों के विरुद्ध महाराष्ट्र दप्तर दिरंगाई अधिनियम, 2005 की धारा 9 व 10, महाराष्ट्र नागरी सेवा (शिस्त व अपील) नियम, 1979 की धारा 5 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 166 व 167 सहित अन्य प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई, विभागीय जांच और आपराधिक शिकायत दर्ज की जाएगी—इसकी गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की गई है।

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