जालना शहर के खतरनाक दरवाजे: एड. धन्नावत की रिट याचिका और लगातार प्रयासों से ही प्रशासन जागा, दोहरे रवैये पर उठे सवाल

जालना | कादरी हुसैन
जालना शहर में नागरिकों की जान के लिए खतरा बने ऐतिहासिक एवं जर्जर दरवाजों का मामला अब आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसका श्रेय एड. महेश धन्नावत की पिछले दो वर्षों से जारी कानूनी लड़ाई को दिया जा रहा है। हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर किए जाने तथा सक्षम अधिकारी श्री शर्मा द्वारा पदभार संभालने के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ है। हालांकि अभी तक किसी भी दरवाजे पर बुलडोजर नहीं चलाया गया है। फिलहाल केवल खतरनाक हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

घटनाक्रम इस प्रकार है—
1. 11 जनवरी 2023 : जिला कलेक्टर, जालना ने उप सचिव को लिखित रूप से सूचित किया कि इन ऐतिहासिक दरवाजों के स्वामित्व संबंधी कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है।
2. 4 सितंबर 2023 : एड. महेश धन्नावत ने उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ), जालना को ज्ञापन देकर पानीवेस सहित सभी जर्जर एवं खतरनाक दरवाजों को तत्काल ध्वस्त करने की मांग की।
3. 25 अक्टूबर 2023 : उपविभागीय अधिकारी ने एड. धन्नावत के आवेदन के आधार पर जालना महानगरपालिका आयुक्त को पत्र भेजकर इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इन पत्रों पर प्रशासन ने एक वर्ष से अधिक समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। प्रशासन वास्तव में तब सक्रिय हुआ जब महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग, मुंबई में शिकायत दर्ज कराई गई। आयोग के निर्देश पर सिविल टेक, नासिक द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पानीवेस, दगवेस, कादराबाद और गणपति गली के दरवाजों को खतरनाक घोषित किया गया।
हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर होने और श्री शर्मा जैसे सक्षम अधिकारी की पहल के बाद ही अब एसडीओ के 25 अक्टूबर 2023 के पत्र के आधार पर खतरनाक दीवारों को हटाने का कार्य शुरू किया गया है।
इससे पहले मूर्तीवेस दरवाजा गिर जाने के कारण लगभग 18 महीने तक मुख्य मार्ग बंद रहा था। उसे हटवाने में भी एड. महेश धन्नावत के लगातार प्रयास सफल रहे थे।
दोहरे रवैये का आरोप: दरगाह के लिए सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा की अनदेखी
सबसे गंभीर बात यह है कि 15 तारीख को प्रस्तावित दरगावेस तोड़ने की कार्रवाई के लिए जालना महानगरपालिका ने पुलिस सुरक्षा की मांग की है। एड. धन्नावत का आरोप है कि दरगाह को हटाने के लिए प्रशासन ने तत्काल योजना और पुलिस बंदोबस्त किया, लेकिन पिछले दो वर्षों से नागरिकों के सिर पर मंडरा रहे जानलेवा दरवाजों के मामले में लगातार टालमटोल की गई।
एड. महेश धन्नावत ने कहा, “एसडीओ के पत्र, मानवाधिकार आयोग की दखल, हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका और श्री शर्मा के प्रयासों के कारण ही आज यह फाइल आगे बढ़ी है। अन्यथा प्रशासन इसे बंद अलमारी में ही दबाकर रखता। फिलहाल किसी भी दरवाजे पर बुलडोजर नहीं चला है। यह केवल दिखावटी कार्रवाई (आईवॉश) है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यदि सात दिनों के भीतर रिपोर्ट में चिन्हित सभी खतरनाक दरवाजों को नहीं हटाया गया, तो हम सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। इसके बाद यदि कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही से मृत्यु (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज कराने की मांग की जाएगी।”
शहरवासियों ने भी प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई कर जालना के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
