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राज ठाकरे का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला: सोनम वांगचुक के अनशन और NEET मुद्दे पर उठाए तीखे सवाल

मुंबई | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा 

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का आज 19वां दिन है और उनकी बिगड़ती सेहत चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने वांगचुक और लोकतांत्रिक आंदोलनों की भावना की अनदेखी करने का फैसला कर लिया है।

राज ठाकरे ने कहा कि जिन संस्थाओं को निष्पक्ष होना चाहिए था, उन्हें भी सत्ता के प्रभाव में ले लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों को मनचाहे तरीके से प्रबंधित किया जा रहा है और इस पर अधिकांश मीडिया सवाल नहीं उठा रहा। उन्होंने कहा कि जो मीडिया सरकार के खिलाफ बोलता है, उसके मालिकों पर भी दबाव बनाया जाता है, जिससे जनहित के आंदोलनों को दबाना सरकार के लिए आसान हो जाता है।

राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में कहा कि एक समय भारतीय जनता पार्टी स्वयं सोनम वांगचुक की सराहना करती थी। वर्ष 2018 में उन्हें एक सम्मेलन में आमंत्रित कर उनकी वैकल्पिक ऊर्जा संबंधी सोच की प्रशंसा की गई थी। लेकिन बाद में जब वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, दो लोकसभा सीटें और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों की मांग उठाई, तब सरकार ने केवल आश्वासन दिए, ठोस कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उनके अनुसार, व्यापम घोटाले से लेकर NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक तक कई घटनाएं सत्ता के दौरान हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के पास सभी संस्थाओं का नियंत्रण होने के कारण जवाबदेही समाप्त होती जा रही है।

राज ठाकरे ने भाजपा पर चुनावी सफलता के आधार पर जनता की चुप्पी को समर्थन मानने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी को सवाल पूछने का अधिकार नहीं समझा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी दलों का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया है और सब कुछ दिल्ली से संचालित हो रहा है।

अंत में राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि वे NEET परीक्षा विवाद और उससे जुड़े छात्रों व अभिभावकों की परेशानियों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है और इसे राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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