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वक्फ बोर्ड की एनओसी के बिना कादराबाद दरगाह बेस नहीं तोड़ी जा सकती; जिला वक्फ अधिकारी ने मनपा को भेजा कड़ा पत्र

जालना | कादरी हुसैन

जालना शहर के कादराबाद स्थित ऐतिहासिक हजरत जानुल्लाह शाह सहाब कादरी ( र.अ) की दरगाह बेस को लेकर नया विवाद सामने आया है। जिला वक्फ अधिकारी, जालना ने जालना महानगरपालिका आयुक्त को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड की पूर्व अनुमति (NOC) के बिना दरगाह बेस को पाडकाम (ध्वस्तीकरण) या किसी भी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया जा सकता।

14 जुलाई 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि हजरत जानुल्लाह शाह साहेब मैनेजिंग खुद्दाम कमेटी ने 13 जुलाई को जिला वक्फ कार्यालय में आवेदन देकर महानगरपालिका द्वारा प्रस्तावित कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद जिला वक्फ अधिकारी ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए महानगरपालिका को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीटीएस क्रमांक 5594, दरगाह वेस, कादराबाद स्थित यह संपत्ति महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल में MSBW/JLN/109/2012 क्रमांक से पंजीकृत वक्फ संपत्ति है। महानगरपालिका ने इमारत को जर्जर एवं खतरनाक बताते हुए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी किए थे।

हालांकि जिला वक्फ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम, 1995 (संशोधित) की धारा 32 के अनुसार वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, प्रशासन और नियंत्रण का अधिकार महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल को प्राप्त है। वहीं धारा 51 के तहत वक्फ संपत्ति के उपयोग, स्वरूप अथवा हित को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई के लिए वक्फ बोर्ड की वैध अनुमति आवश्यक है।

इसी आधार पर महानगरपालिका से कहा गया है कि दरगाह बेस को गिराने, पुनर्निर्माण अथवा किसी भी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन करने से पहले महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है। एनओसी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

इस बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि कादराबाद की ऐतिहासिक दरगाह बेस (प्रवेश द्वार) की देखभाल व संरक्षण की जिम्मेदारी दरगाह कमेटी और महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड की है। लोगों का मानना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को गिराने के बजाय दरगाह कमेटी और वक्फ बोर्ड को अपने खर्च पर इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार कराना चाहिए, ताकि इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके।

इस घटनाक्रम के बाद कादराबाद स्थित ऐतिहासिक दरगाह बेस को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर महानगरपालिका सुरक्षा के दृष्टिकोण से कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों और स्थानीय नागरिकों की मांग ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है।

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