औरंगाबाद: एलईडी स्क्रीन द्वारा बाल विवाह और स्त्रीभ्रूण हत्या के खिलाफ जनजागरूकता अभियान

औरंगाबाद • खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
औरंगाबाद में स्त्रीभ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से इस अभियान के तहत ‘मां मुझे भी जीने दो’ और ‘गुड़िया’ टेलीफिल्मों का एलईडी स्क्रीन के माध्यम से विभिन्न निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन किया जा रहा है।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा स्त्रीभ्रूण हत्या एवं बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान शुरू किया गया है। अभियान के अंतर्गत विभाग की अनुमति प्राप्त हिंदी भाषी जनजागरूकता टेलीफिल्मों को महानगरपालिका क्षेत्र के निर्धारित वार्डों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है।
इन टेलीफिल्मों के माध्यम से नागरिकों को बेटियों के अधिकार, बालिकाओं की सुरक्षा तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया जा रहा है। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रेस नोट के अनुसार इन जनजागरूकता टेलीफिल्मों का निर्माण सोमू वीडियो के बैनर तले निर्माता-निर्देशक अब्दुल समद द्वारा किया गया है, जबकि फिल्मों का लेखन सय्यद फेरोज आशिक ने किया है। कैमरामैन एवं एडिटर अहमद जहागीरदार तथा सह निर्देशन खान अज़हर जकी है। टेलीफिल्मों में अलीशा बेगम, आयशा तजिम, शफी सागर, अनिता शिंदे, अशोक कपूर, विद्या खोतकर और सलीम ताज ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं।
अभियान के आयोजन में छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के आयुक्त जी. श्रीकांत, अतिरिक्त आयुक्त रणजीत आ. पाटील, उपायुक्त लक्ष्मीचंद हरी चव्हाण, समाज विकास अधिकारी विनोद व्हि. परदेशी तथा अतिरिक्त आयुक्त-2 कल्पिता पिंपळे का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है।
निर्माता-निर्देशक अब्दुल समद ने औरंगाबाद शहर के सभी नागरिकों से अपील की है कि निर्धारित समय एवं स्थान पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से प्रदर्शित की जा रही इन जनजागरूकता टेलीफिल्मों को अवश्य देखें। उन्होंने कहा कि स्त्रीभ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक जागरूकता को मजबूत करना जरूरी है।
