नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, अबतक 626 लोगों की मौत; 2,426 अब भी लापता

नेपाल | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
काठमांडू, 30 अगस्त। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद तेज बहाव और मलबे ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,426 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। घायलों में से 101 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। बचाव कार्यों में नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15 हजार से अधिक जवानों को लगाया गया है।
भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़
26 अगस्त की सुबह नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक पानी और मलबे का अत्यंत तेज प्रवाह आया। इसके बाद बाढ़ का पानी आगे बढ़ते हुए कई क्षेत्रों में तबाही मचाता गया। बाढ़ ने मकानों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया तथा कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया।
बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, चितवन और नवलपरासी सहित कई क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। चितवन में सबसे अधिक 233 शव बरामद किए गए हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व में 158 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान
नेपाल की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जलविद्युत क्षेत्र को भी इस आपदा से बड़ा झटका लगा है। कई जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग बाढ़ के कारण फंस गए थे। बचाव दलों ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
बाढ़ से महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
2,426 लोग अब भी लापता
नेपाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था के अनुसार 2,426 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें नेपाली नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े सैकड़ों लोगों के भी लापता होने की सूचना है।
लापता लोगों की तलाश के लिए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कई स्थानों पर मलबा हटाने और क्षतिग्रस्त सड़कों को दोबारा खोलने का काम भी जारी है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस भीषण त्रासदी के बीच भारत ने राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता उपलब्ध कराई है। भारत की ओर से अब तक 57.6 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है।
नेपाल के अनुरोध पर भारत की 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी वहां पहुंची है। इस दल में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ सुरंगों में बचाव कार्य करने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा मृतकों की पहचान में सहायता के लिए भारत से छह विधि-विज्ञान विशेषज्ञ दल नेपाल भेजे जाने की तैयारी है।
भारत से भेजे गए विशेषज्ञ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर बचाव कार्यों में सहायता कर रहे हैं।
287 भारतीय अब भी लापता
नेपाल की बाढ़ में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार 287 भारतीय नागरिक अभी भी लापता बताए गए हैं। इसके अलावा भारतीय मूल के 128 ऐसे लोग भी लापता हैं जिनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।
बचाव अभियान के दौरान 88 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। रसुवा की एक जलविद्युत परियोजना से चार भारतीयों को भी सुरक्षित बचाया गया है। वहीं चीन से नेपाल पहुंचे 120 भारतीय नागरिकों की भारत वापसी की व्यवस्था की जा रही है।
पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के अनुसार, इस भीषण आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए नेपाल को लगभग 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने इसे प्रारंभिक अनुमान बताते हुए कहा है कि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।
बाढ़ से सड़कों, पुलों, बस्तियों और ऊर्जा परियोजनाओं को हुए नुकसान के कारण नेपाल के सामने लंबे समय तक पुनर्निर्माण की चुनौती रहेगी।
राहत के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की चुनौती
नेपाल सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराना है। इसके बाद अस्थायी आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की बहाली का काम किया जाएगा।
नेपाल के वित्त मंत्री ने कहा है कि राहत और बचाव के बाद अगला चरण शीघ्र पुनर्बहाली का होगा, जिसमें अस्थायी आवास और रोजगार आधारित सहायता शामिल होगी। इसके बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
यह त्रासदी नेपाल के लिए केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि सड़क, पुल, ऊर्जा, आवास और अर्थव्यवस्था के स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। बचाव दल लगातार कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और आने वाले दिनों में मलबे से और शव मिलने की आशंका के बीच लापता लोगों की तलाश अभियान जारी रहेगा।
