दहीहंडी उत्सव पर हादसों का साया, नवी मुंबई में 2 गोविंदाओं की मौत, 306 से अधिक घायल

मुंबई | खासदार टाईम्स वृत्तसेवा
महाराष्ट्र में शनिवार को दहीहंडी उत्सव बड़े उत्साह, उमंग और धूमधाम के साथ मनाया गया। ‘गोविंदा आला रे आला’ के जयघोष से मुंबई समेत राज्यभर का माहौल भक्तिमय और उत्सवी नजर आया। गली-मोहल्लों से लेकर बड़े मैदानों तक गोविंदा पथकों ने एक के ऊपर एक मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी दहीहंडियों को फोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान गोविंदाओं में जीत हासिल करने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
मुंबई और आसपास के इलाकों में दहीहंडी को लेकर सुबह से ही उत्सव का माहौल बना रहा। विभिन्न स्थानों पर दहीहंडी आयोजनों के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। ढोल-ताशों और ‘गोविंदा आला रे आला’ के नारों के बीच गोविंदा पथकों ने मानव मनोरे बनाए और दहीहंडी फोड़कर उत्सव मनाया।
हालांकि, इस उत्साह और जश्न को कई हादसों ने गहरा झटका दिया। मानव पिरामिड बनाते समय संतुलन बिगड़ने और ऊंचाई से नीचे गिरने के कारण कई गोविंदा घायल हो गए। मुंबई और नवी मुंबई में हुए हादसों में कुल 2 गोविंदाओं की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई। वहीं, 306 से अधिक गोविंदा गंभीर और मामूली रूप से घायल हुए हैं।
हादसों के बाद घायलों को उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया। कई गोविंदाओं को गिरने के कारण चोटें आईं, जबकि कुछ को गंभीर चोटों के चलते चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता पड़ी। दहीहंडी जैसे आयोजनों में मानव पिरामिड की ऊंचाई बढ़ने के साथ हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है।
दहीहंडी महाराष्ट्र की लोकप्रिय सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में से एक है। हर वर्ष इस उत्सव में बड़ी संख्या में गोविंदा पथक हिस्सा लेते हैं। ऊंची से ऊंची हंडी फोड़ने के लिए गोविंदा कई स्तरों वाला मानव पिरामिड बनाते हैं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने पर गोविंदाओं के नीचे गिरने का खतरा बना रहता है।
इस बार भी राज्यभर में उत्सव का जोश चरम पर रहा, लेकिन मुंबई और नवी मुंबई में हुई मौतों और बड़ी संख्या में गोविंदाओं के घायल होने से उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सावधानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसों ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि परंपरा और उत्साह के साथ गोविंदाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
