Breaking NewsJalnaPolitics

जालना में अपराध के खिलाफ भाजपा नगरसेविका एड. रीमा संदीप खरात काले के नेतृत्व में धड़क मोर्चा; पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी

जालना/कादरी हुसैन

जालना शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, अवैध धंधों, हत्या, लूटपाट और अत्याचार के मामलों को लेकर नागरिकों में बढ़ते आक्रोश के बीच भाजपा नगरसेविका एड. रीमा संदीप खरात काले के नेतृत्व में सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार मोर्चा निकाला गया। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिक, कार्यकर्ता और आपराधिक घटनाओं से प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मोर्चे की शुरुआत मस्तगढ़ स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर की गई। इसके बाद आंदोलनकारियों ने पुलिस की कथित निष्क्रियता के विरोध में प्रतीकात्मक अर्थी लेकर प्रदर्शन करने का प्रयास किया। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए आंदोलनकारियों के हाथ से प्रतीकात्मक अर्थी अपने कब्जे में ले ली। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की होने की जानकारी सामने आई।

मस्तगढ़ से शुरू हुआ मोर्चा गांधी चमन, शनि मंदिर, नूतन वसाहत और अंबड़ चौफुली मार्ग से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। रास्तेभर आंदोलनकारियों ने ‘अपराध पर लगाम लगाओ’, ‘शहर को भयमुक्त करो’, ‘गुंडों पर कड़ी कार्रवाई करो’ और ‘पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

आंदोलनकारियों ने जालना शहर में कथित रूप से बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों पर तत्काल अंकुश लगाने की मांग की। आदतन और गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों के खिलाफ एमपीडीए तथा मकोका (MCOCA) जैसी कठोर कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई करने और शहर को अपराध तथा भय के माहौल से मुक्त करने की मांग की गई।

15 दिनों का अल्टीमेटम, मंत्रालय के सामने आंदोलन की चेतावनी

मोर्चे के दौरान पुलिस प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में गुंडागर्दी और आपराधिक गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, आदतन अपराधियों के खिलाफ एमपीडीए या मकोका के तहत कार्रवाई नहीं हुई और शहर को भयमुक्त करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो मुंबई स्थित मंत्रालय के सामने उपोषण और धरना आंदोलन किया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने शहर में अपराध की स्थिति को लेकर ‘क्या जालना बिहार बन गया है?’ जैसे सवाल भी उठाए और इस मुद्दे की ओर राज्य सरकार एवं मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करने की बात कही।

मोर्चे में हत्या, चाकू हमले और अन्य आपराधिक घटनाओं में अपने बच्चों एवं युवाओं को खो चुके परिवारों के सदस्य और रिश्तेदार भी शामिल हुए। हाथों में विरोध के फलक लेकर पहुंचे पीड़ित परिवारों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की। उनका कहना था कि अपराधियों पर समय रहते कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

मोर्चे के चलते जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस ने पर्याप्त बंदोबस्त तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में रखा। अब इस आंदोलन के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा जालना शहर में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर नागरिकों की नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button