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जालना बस स्टैंड पर सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी पर मारपीट के आरोप, महिला-भाई और बच्चों को थाने ले जाने से यात्रियों में आक्रोश

जालना/कादरी हुसैन

जालना बस स्टैंड पर यात्रियों के बीच मामूली बात को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया, जब सिविल ड्रेस में मौजूद एक व्यक्ति द्वारा खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए एक महिला यात्री और उसके भाई के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। घटना के बाद संबंधित व्यक्ति के फोन पर कुछ ही मिनटों में पुलिस वाहन बस स्टैंड पहुंचा और महिला, उसके भाई तथा छोटे बच्चों को थाने ले जाया गया। इस घटनाक्रम को लेकर बस स्टैंड पर मौजूद यात्रियों में नाराजगी देखी गई।

मिली जानकारी के अनुसार, हिंगोली से छत्रपति संभाजीनगर जा रही बस जालना बस स्टैंड पहुंची थी। बस से यात्री उतर रहे थे। इसी दौरान कंडक्टर द्वारा यात्रियों से पहले बस के अंदर बैठे यात्रियों को उतरने देने और उसके बाद बाहर खड़े यात्रियों को बस में चढ़ने की बात कही गई। इसी बात को लेकर सिविल ड्रेस में मौजूद एक व्यक्ति का यात्रियों से विवाद होने की जानकारी सामने आई है।

आरोप है कि विवाद बढ़ने पर संबंधित व्यक्ति ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और महिला यात्री तथा उसके भाई के साथ गाली-गलौज एवं धक्का-मुक्की की। महिला और उसके भाई के साथ थप्पड़-बुक्कों से मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। यात्रियों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित व्यक्ति के साथ मौजूद एक महिला ने छोटे बच्चों के साथ मारपीट की।

विवाद के दौरान बस के कंडक्टर के साथ भी धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप है। घटना के चलते कुछ समय के लिए बस स्टैंड पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौजूद यात्रियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

एक फोन पर पुलिस वाहन पहुंचने को लेकर उठे सवाल

घटना के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा पुलिस को फोन किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके कुछ ही मिनटों में पुलिस वाहन बस स्टैंड पहुंच गया। इसके बाद महिला यात्री, उसके भाई और छोटे बच्चों को पुलिस वाहन से थाने ले जाया गया।

इस घटनाक्रम को लेकर यात्रियों और नागरिकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि संबंधित व्यक्ति आम नागरिक था, तो पुलिस वाहन इतनी जल्दी कैसे पहुंचा और यदि वह पुलिसकर्मी था, तो क्या उसने अपने पद का इस्तेमाल निजी विवाद में किया? हालांकि, इन सवालों का स्पष्ट उत्तर जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

पुलिसकर्मी होने की स्थिति में अधिकार के इस्तेमाल पर भी सवाल

संबंधित व्यक्ति वास्तव में पुलिस कर्मचारी है या नहीं, यदि वह पुलिस कर्मचारी है तो किस विभाग में कार्यरत है, बस स्टैंड पर सिविल ड्रेस में उसकी मौजूदगी किस उद्देश्य से थी और विवाद के दौरान उसकी भूमिका क्या रही—इन सभी बिंदुओं की जांच की मांग की जा रही है।

इसके साथ ही महिला यात्री, उसके भाई और बच्चों के साथ मारपीट के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग है। पुलिस वाहन किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में बस स्टैंड पहुंचा, इसकी भी जांच किए जाने की आवश्यकता बताई जा रही है।

यात्रियों ने बस स्टैंड के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की

नागरिकों का कहना है कि मामले में किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य मानने के बजाय बस स्टैंड के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित पक्षों की शिकायत के आधार पर पूरी घटना की जांच की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस पद या अधिकार का दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस मामले में संबंधित यात्रियों के रूप में निकिता शिंदे, लक्ष्मण कोल्हे और जतन शिंदे के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रस्तावित मोर्चे की पृष्ठभूमि में घटना चर्चा में

जालना शहर में पुलिस प्रशासन के कथित कामकाज के विरोध में भाजपा नगरसेविका रीमा खरात काले के नेतृत्व में तिरडी मोर्चा निकाले जाने की पृष्ठभूमि में बस स्टैंड की यह घटना भी चर्चा में आ गई है। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों के बीच सवाल उठाए जा रहे हैं।

नागरिकों की मांग है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के माध्यम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाए तथा घटना की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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